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बिहार के हर 5वें घर में एक महिला जन-प्रतिनिधि है: आरक्षण के परे राजनितिक हिस्सेदारी

निकाय चुनाव:

हाल ही में बिहार में सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में 50% आरक्षण होने के बावजूद मेयर पद पर कुल 94.12% एवं उपमेयर पद पर 64.70% महिला जन-प्रतिनिधियों का चुना जाना महिला सशक्तिकरण की और ऐसे संकेत दे रही है जो भारतीय राजनीती में अप्रत्याशित है। नगर निकाय चुनाव में 17 नगर निगमों में से 16 नगर निगम क्षेत्र में मुख्य पार्षद पद (मेयर) पर एवं 17 में से 11  उप मुख्य पार्षद (उपमेयर) पद पर महिला जन-प्रतिनिधियों का निर्वाचन हुआ है। इतना ही नहीं सिर्फ दूसरे चरण में 146 ऐसे महिला वार्ड सदस्य जीते हैं, जो अनारक्षित वार्ड थे।  

इतिहास:

बिहार में महिलाओं की बढती राजनितिक हिस्सेदारी का सफ़र न तो बहुत पुराना है और न ही बहुत नया है. वर्ष 2021 में हुए पंचायती चुनावों में भी पूरे प्रदेश में लगभग 57 प्रतिशत महिला जन-प्रतिनिधि निर्वाचित हुई थी, जो उन्हें मिलने वाले 50 प्रतिशत आरक्षण से कहीं अधिक है। आज पूरे बिहार में 57887 महिला जन-प्रतिनिधि पंचायती राज का प्रतिनिधित्व कर रही है यानि कि लगभग हर पाँचवें घर में एक महिला प्रतिनिधि है।

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बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत एवं निकाय चुनाव में 50% आरक्षण दिया। बिहार के इस मॉडल को देश के कई राज्यों ने बाद में फॉलो किया। बिहार महिला विधायकों को सदन भेजने के मामले में 2005 से लगातार पूरे हिंदुस्तान तीन अव्वल राज्यों में से एक रहा है। 

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चित्र: संसद में महिला आरक्षण की मांग के साथ सड़कों पर बिहार की महिला जन-प्रतिनिधि. स्त्रोत: The Wire

दलगत महिला प्रतिनिधि

इसके अलावा इस दिशा में जनता दल (यू) का पार्टी स्तर पर भी इतिहास रहा है।  बिहार में 2010 में 34 महिला विधायक थी, जिसमें से 21 अकेले JDU से थी। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में कुल उम्मीदवारों का 10 % हिस्सा महिलाओं का था जबकि JD(U) ने लगभग 18% टिकट महिलाओं को दिया। 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मात्र 13 महिलाओं को टिकट दिया जबकि JDU ने 22 महिलाओं को टिकट दिया। बिहार में वर्तमान में 7 महिला एमएलसी हैं जिसमें से तीन महिला एमएलसी JDU की है, जबकि बीजेपी से मात्र एक महिला एमएलसी हैं। 

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अभी संपन्न हुए गुजरात चुनाव में बीजेपी के 156 विधायक में से मात्र 13 महिला हैं, जो पार्टी के कुल विधायकों के अनुपात में मात्र 8.33 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश में बीजेपी महिला विधायकों का अनुपात 8.46 प्रतिशत और यूपी में यह अनुपात 10.98 प्रतिशत है। जबकि JDU के विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद आज भी  JDU महिला विधायकों का अनुपात 13.96 है।

युवा जन-प्रतिनिधि

इस नगर निकाय चुनाव में एक पुराने मिथक को जनता ने तोड़ते हुए युवा महिला जन-प्रतिनिधियों को तरजीह दी है और कई बड़े एवं पुराने चेहरे को शिकस्त दी है।  जनता ने जहां मात्र 21 साल की छात्रा  को अपना मुख्य पार्षद चुना है, वहीँ पूर्व उपमुख्यमंत्री के बहू को हराया भी है। ऐसे कई उदाहरण इस चुनाव में सामने आये हैं जिसमें बड़े एवं धाकड़ नेताओं के परिजनों के बजाय जनता ने युवा एवं नए चेहरे को प्राथमिकता दी है। इस चुनाव में महिलाओं  के साथ-साथ युवाओं का जलवा इस कदर रहा कि नगर निकाय चुनाव में कई निकायों में 80% से ज्यादा युवा चुनकर आये हैं।

सफ़र बाकी है:

महिला आरक्षण का प्रश्न आज़ादी के बाद से ही ज्वलंत रहा है. पंचायती राज के अंतर्गत तो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण संवैधानिक रूप से दिया गया लेकिन सांसद और राज्यों के विधान सभाओं व् विधान परिषदों में महिलाओं को अपने अधिकार के लिए संभवतः अभी और इंतजार करना पड़ेगा. निकाय चुनावों में महिला जन-प्रतिनिधियों के बढ़ते प्रतिनिधित्व एक सुनहरे भविष्य की और इशारा कर रहा है.

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चित्र: भारतीय सांसद के गिने-चुने महिला जन-प्रतिनिधि; स्त्रोत: ग्लोबल रिसर्च नेटवर्क ऑन पार्लियामेंट एंड पीपल

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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