HomeCurrent Affairsअयोध्या के रामायण संग्रहालय के साथ ऐसा खेल क्यूँ?

अयोध्या के रामायण संग्रहालय के साथ ऐसा खेल क्यूँ?

पिछले हफ़्ते से एक खबर आ रही है कि अयोध्या में भगवान राम के जीवन पर वैक्स रामायण संग्रहालय मतलब म्यूज़ियम बनाया जा रहा है। अयोध्या में भगवान राम के जीवन पर बनने वाली संग्रहालय की यह तीसरी योजना है। एक साल 2016 में, दूसरा 2017 में, दूसरा प्रोजेक्ट फिर से 2021 में नए शीरे से घोषित होता है और तीसरा अब 2023 में वैक्स संग्रहालय। हालाँकि अभी तक इन तीनों में से एक भी संग्रहालय बनकर तैयार नहीं हुआ है। और शायद कभी बनकर तैयार भी न हो। भगवान राम के जीवन पर आधारित इन संग्रहालयों को बनवाने में इतना विलम्ब क्यूँ हो रहा है ? 

पहला रामायण संग्रहालय:

भगवान राम या रामायण के नाम पर कोई संग्रहालय बनाने का पहला प्रयास साल 1966 में हुआ था जब मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के जंगलों में मानस संघ नामक एक संस्था, जो हनुमान के नाम पर पंजीकृत थी, वो सतना-रेवा रोड पर विंध्या के जंगलों  के पत्थरों पर रामायण की कहानी उकेरने का प्रयास किया था। लेकिन इस योजना में भारत सरकार ने कोई योगदान नहीं दिया था।

राज्य या केंद्र सरकार द्वारा भगवान राम के जीवन पर बनने वाली किसी भी तरह के संग्रहालय बनाने की घोषणा सबसे पहले साल 2016 में हुई थी जब रामायण सर्किट प्रोजेक्ट के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने भगवान राम के जीवन को प्रदर्शित करने के लिए 85.34 करोड़ के एक प्रोजेक्ट का आग्रह केंद्र सरकार से किया था। लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि वो संग्रहालय होगा या आर्ट गैलरी होगा, या कुछ और होगा।

और उससे महत्वापूर्ण बात ये है कि उस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा नहीं बल्कि सपा की सरकार थी और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मतलब भगवान राम के जीवन पर आधारित किसी संग्रहालय की योजना भाजपा की सरकार नहीं बल्कि सपा की सरकार ने बनाई थी। और ये जानकारी मनगढ़ंत नहीं है बल्कि 28 नवम्बर 2016 को गोपालगंज के भाजपा सांसद जनक राम द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में देश की संसद में मिला था।

उस समय ये राजनीतिक मुद्दा बन गया था क्यूँकि अखिलेश सरकार द्वारा रामायण संग्रहालय बनाने की घोषणा करने के कुछ ही महीने बाद अक्तूबर 2016 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने यह जनता से यह वादा किया कि अगर उत्तर प्रदेश की जनता उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जितावती है तो उनकी सरकार अयोध्या में Ramayan international museum and research centre बनवाएगी। इसपर जवाब में सपा नेता ये बताने लगे कि उनकी अखिलेश कुमार की सरकार तो पहले से ही अयोध्या में रामायण संग्रहालय बनवाने की घोषणा कर चुकी है।

Why Construction of Ramayana Museum Delayed in Ayodhya ? | News Hunters |

लेकिन इस सच्चाई के बावजूद फ़रवरी 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत हुई, योगी अडियनाथ पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और मुख्यमंत्री बनने के एक महीने के भीतर मार्च 2017 में योगी सरकार ने अयोध्या में  अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय बनाने की घोषणा भी कर दी और उसके लिए 20 एकड़ ज़मीन आवंटित भी कर दी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए 225 करोड़ रुपए का फंड भी स्वीकृत कर दिया और 18 महीने का डेड्लायन भी दे दिया, इस काम को पूरा करने के लिए। उत्तर प्रदेश का

विपक्ष ने फिर से हल्ला किया कि अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय का निर्माण इस आपाधापी में 2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए किया जा रहा है। 2019 का चुनाव भी ख़त्म हो गया, दुबारा भाजपा की मोदी सरकार भी बन गई केंद्र में, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय का निर्माण शुरू तक नहीं हो पाया। 

जनवरी-फ़रवरी 2022 में उत्तर प्रदेश में फिर से विधानसभा चुनाव होना था इसलिए 2021 में अयोध्या के इस 2016 से प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय के चर्चे फिर से शुरू हो गए। लेकिन इस बार योजना में कुछ बदलाव हुआ। पहले जो अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय अयोध्या से दस किलोमीटर के भीतर बनना तय हुआ था और जिसके लिए बीस एकड़ ज़मीन भी आवंटित हो गई थी वो अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय अब अयोध्या से 64 किलोमीटर दूर लखनऊ अयोध्या नैशनल हाइवे पर बनना तय हुआ।

फिर से दुबारा ज़मीन का आवंटन शुरू हुआ, नया प्रोजेक्ट बना, लेकिन पिछला प्रोजेक्ट जो अयोध्या से मात्र दस किमी के भीतर बनना था उसका क्या हुआ किसी को पता नहीं। उस अयोध्या वाले, 2017 वाले अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय के लिए जो केंद्र सरकार की तरफ़ से 225 करोड़ रुपए आवंटित हुए थे उसका क्या हुआ उसका भी कुछ पता नहीं।

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2017 वाला  प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय 25 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर बनाना था और अब 2021 वाला नया प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय मात्र दस वर्ग किलोमीटर में बनेगा। राम मंदिर के साथ रामायण संग्रहालय प्रोजेक्ट के सहारे साल 2022 में उत्तर प्रदेश में फिर से योगी जी की दूसरी बार सरकार बनी। मीडिया में फिर से इस अंतर्राष्ट्रीय रामायण संग्रहालय की खबर खूब चली लेकिन संग्रहालय का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अगस्त 2023 तक इस नए प्रस्तावित संग्रहालय के लिए ज़मीन तक आवंटित नहीं हुआ था।

चौथा रामायण संग्रहालय:

अब 2023 में फिर से अयोध्या में एक नए रामायण संग्रहालय बनाने का चर्चा चल रहा है। लेकिन दो पुराने संग्रहालय जिसकी घोषणा 2016, 2017 और 2021 में हुई थी उसका कोई अता पता नहीं है। अब ये तीसरा संग्रहालय कब बनकर तैयार होता है ये तो समय ही बताएगा लेकिन इस नए रामायण संग्रहालय के ठेकेदार और कलाकार सुनील कंडल्लूर इसके निर्माण में हो रहे विलम्ब से परेशान है। वो बार बार स्थानिये प्रशासन पर प्रोजेक्ट को डिले करने का आरोप लगा रहे है। इसके कलाकार सुनील पहले भी नरेंद्र मोदी, सचिन, तेंदुलकर, शरद पवार, आना हज़ारे, बाल ठाकरे, रजनीकांत और MG रामाचंद्रन जैसे लोगों के पुतले बना चुके हैं।

योजना के अनुसार ये मोम का संग्रहालय अप्रैल-मई 2024 तक पूरा हो जाना चाहिए। इस संग्रहालय में लगभग एक सौ मोम के पुतले होंगे जो रामायण के 30-35 घटनाओं को चित्रित करने का प्रयास करेंगे, जिसमें सीता का स्वयंबर, उनका बनवास, लंका का दहन आदि शामिल है। ये संग्रहालय मात्र ढाई एकड़ ज़मीन पर बन रही है जिसकी कुल लागत मात्र सात करोड़ है।

ये ढाई एकड़ और सात करोड़ रुपए 2016 के अखिलेश यादव के रामायण संग्रहालय के 25 एकड़ ज़मीन और 85 करोड़ रुपए के फंड के सामने बहुत कम है। और ये योगी जी द्वारा 2017 और 2021 में घोषित दस एकड़ ज़मीन और 225 करोड़ के फंड के सामने बहुत कम है। अब 2016 या 2017 वाला या फिर 2021 वाला रामायण संग्रहालय तो आज तक बनकर तैयार नहीं हुआ है, तो अब देखते हैं कि ये 2023 वाला रामायण संग्रहालय कब बनकर तैयार होता है।

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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