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विकास के 5 रैंकिंग और 5 मानक जिसमें पाकिस्तान ने हिंदुस्तान को पछाड़ा।

प्रेस फ़्रीडम रैंकिंग :

2023 में जारी 180 देशों की प्रेस फ़्रीडम रैंकिंग में भारत का स्थान लुढ़ककर 161वाँ  चला गया है जो कि 2022 में 150वाँ था। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान जिसका रैंकिंग 2022 में 157वाँ था वो इस साल यानी कि 2023 में 150वाँ हो गया। यानी की भारत से 11 कदम आगे। इस रैंकिंग में एक तरफ़ भारत नीचे जा रहा है और आर्थिक रूप से तबाह होने के बावजूद पाकिस्तान प्रेस फ़्रीडम में ऊपर आ रहा है, सुधार कर रहा है। 

रैंकिंग नम्बर २:

137 देशों के वर्ल्ड हैपीनेस इंडेक्स 2023 में भारत का स्थान 126वाँ है जबकि पाकिस्तान 108वें स्थान पर है। मतलब की चाहे पाकिस्तान जितना भी तबाह हो, गरीब हो लेकिन भारत से ज़्यादा खुश है। हप्पीनेस के एक दूसरे रैंकिंग के अनुसार भारत को 140वाँ स्थान मिला और पाकिस्तान को 67वाँ स्थान मिला है। 2014 तक भारत और पाकिस्तान का स्थान लगभग एक जगह था। लेकिन उसके बाद पाकिस्तान की हालत लगातार सुधरी है और हिंदुस्तान की बिगड़ी है। 

रैंकिंग नम्बर ३:

Gallup Law ऐंड ऑर्डर इंडेक्स 2021 के अनुसार 121 देशों में से भारत का स्थान 60वाँ है जबकि पाकिस्तान का स्थान 48वाँ है। पाकिस्तान में इतने आतंकवादी हैं, फिर भी वहाँ हिंदुस्तान से ज़्यादा अच्छा लॉ एंड ऑर्डर है। कैसे? चकरा गए? क्यूँकि वहाँ छोटी-मोटी वारदातें कम होती है, जैसे चोरी-चमारी, घर-ज़मीन के लिए लड़ाई और उस लड़ाई में मौतें, आदि आदि और भारत में ऐसी ही छोटी-मोटी वारदातें सबसे ज़्यादा होती है। उदाहरण के लिए बिहार में सबसे ज़्यादा मर्डर ज़मीन के विवाद के कारण होता है, सबसे ज़्यादा कोर्ट में केस ज़मीन से सम्बंधित है। अब ये ख़ुदा का ख़ौफ़ हो या आर्मी रूल का ख़ौफ़ पर क्राइम तो कम है पाकिस्तान में, हिंदुस्तान की तुलना में।

रैंकिंग नम्बर ४:

ग्लोबल हंगर इंडेक्स, यानी की भुखमरी की रैंकिंग, जिसमें हिंदुस्तान का रैंक साल 2022 में अफ़ग़ानिस्तान से मात्र दो कदम बेहतर 107वाँ स्थान रहा जबकि पाकिस्तान का रैंक 99 था, बांग्लादेश 84, नेपाल 81 और श्रीलंका 64वें स्थान पर था। वैसे जानना चाहें तो ये भी जान सकते हैं 2021 तक भारत 101वें स्थान पर था और 2020 में 94वें स्थान पर था यानी कि पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में था।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत की हालत ख़राब हुई है। और हो भी क्यूँ नहीं, भारत में पूरी दुनियाँ में सर्वाधिक चाइल्ड वेस्टिंग दर 19.3 प्रतिशत है जो 2012-16 के दौरान मात्र 15.1 प्रतिशत था। इसी तरह 2018-20 की तुलना में कुपोषण भी भारत में 14.6 से बढ़कर 16.3 प्रतिशत हो गया है। अब असमानता बढ़ेगी, चाइल्ड वेस्टिंग बढ़ेगी, कुपोषण बढ़ेगा तो फिर ग्लोबल हंगर इंडेक्स में हम कैसे बेहतर करने की उम्मीद कर सकते हैं?

रैंकिंग नम्बर ५:

वर्ल्ड एकनामिक फ़ोरम ने 2004 से लेकर 2020 तक ग्लोबल कम्पेटिटिव्नेस इंडेक्स जारी किया था। साल 2004 में भारत 102 देशों में 56वें स्थान पर था और पाकिस्तान 72वें स्थान पर था। साल 2008-09 में भारत 134 देशों की रैंकिंग में 50वें स्थान पर आ गया और पाकिस्तान इसी दौरान 102वें स्थान तक लुढ़क गया। उसके बाद देश में एक के बाद एक घोटाले हुए और भारत की रैंकिंग 2013-14 में 148 देशों में से 60वें स्थान पर चला गया जबकि पाकिस्तान 133वें स्थान पर चला गया।

लेकिन साल 2018 आते-आते भारत का स्थान 62वाँ हो गया और पाकिस्तान का 47वाँ। 2019 में तो भारत की स्थिति और भी अधिक ख़राब हुई और 68वें स्थान पर लुढ़क गया, जो आजतक का सबसे नीचे हैं। 2020 के रिपोर्ट में पूरा रैंकिंग नहीं दिया गया लेकिन इस रिपोर्ट में भी भारत ने ज़्यादातर मनकों नकारात्मक विकास किया है। 

विकास के इन 10 मामलों (Ranking) में India आज भी Pakistan से पीछे क्यूँ है?

लेकिन सवाल उठता है कि आख़री विकास के कौन से ऐसे मानक हैं जिसमें पाकिस्तान भारत से बेहतर है जिसके कारण पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से ज़्यादा बेहतर हो जाती है। चाहे GDP हो या लाइफ़ इक्स्पेक्टन्सी हो या लाइफ़ का डिसिज़न लेने का फ़्रीडम हो, सबमें तो भारत बेहतर है पाकिस्तान से फिर रैंकिंग में भारत क्यूँ पीछे है पाकिस्तान से? क्यूँकि भारत सोशल सपोर्ट में नीचे है। भारत में असमानता पाकिस्तान की तुलना में बहुत ज़्यादा है।

एक आँकड़े के अनुसार अम्बानी-अड़ानी जैसे भारत के सर्वाधिक एक प्रतिशत धनी लोगों ने भारत की कुल सम्पत्ति में से 22 प्रतिशत हिस्से पर अपना क़ब्ज़ा जमा रखा है। हालाँकि एक दशक पहले तक इनका भारत की मात्र 7 प्रतिशत सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा था। यानी की इन अम्बानी अड़ानी जैसे धन-कुबेरों का भारत की सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा पिछले एक दशक के दौरान तीन गुना बढ़ गया और गरीब और भी अधिक गरीब होते चले जा रहे हैं।

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अब इन पाँच ग्लोबल रैंकिंग की सूची के बाद नम्बर है पाँच विकास के अन्य मनकों को जिसमें भारत पाकिस्तान से पीछे है। 

पैमाना नम्बर 1: लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व की अन्य देशों की जनसंख्या बूढ़ी हो रही है भारत विश्व का सर्वाधिक यूवा देश है। भारत की जनसंख्या की औसत आयु 28.7 वर्ष है और पाकिस्तान की 22 वर्ष, इस तरह से पाकिस्तान हिंदुस्तान से अधिक यूवा देश है। पाकिस्तान के अलावा विश्व में कम से कम दो दर्जन ऐसे देश हैं जो भारत से कहीं अधिक यूवा है। इस मानचित्र पर जितने भी हरे रंग में देश देख रहें है वो सब भारत से अधिक यूवा है। 

पैमाना नम्बर 2: हिंदुस्तान का मृत्यु दर पाकिस्तान से ज़्यादा है। भारत का मृत्यु दर 9.45 प्रतिशत है और पाकिस्तान का 7.17 प्रतिशत। यानी कि विकास ज़्यादा हमने किया है, और मर भी सबसे ज़्यादा हम ही रहे हैं। क्यूँ? इस क्यूँ का जवाब है विकास के हमारे पैमाना नम्बर तीन में) पाकिस्तान में प्रति एक लाख लोगों पर 63 हॉस्पिटल बेड है जबकी हिंदुस्तान में मात्र 53, इसी तरह पाकिस्तान में प्रति एक लाख  जनसंख्या पर 98 डॉक्टर हैं जबकि हिंदुस्तान में मात्र 78 डॉक्टर हैं।

पैमाना नम्बर 4: भारत में बेरोज़गारी पाकिस्तान से भी ज़्यादा है। चौंक गए?साल 2022 के दौरान पाकिस्तान में बेरोज़गारी दर 6.42% था जबकि हिंदुस्तान में 7.33% था। इसी तरह 2021 में पाकिस्तान में बेरोज़गारी दर 6.34% था जबकि हिंदुस्तान का 7.71%। 2020 में पाकिस्तान का बेरोज़गारी दर 6.55% था और हिंदुस्तान का 10.20 प्रतिशत। यानी पिछले तीन सालों से पाकिस्तान का बेरोज़गारी दर हिंदुस्तान से ज़्यादा रहा था। 

पैमाना नम्बर 5: भारत में हम महिलाओं को तीन तलाक़ और बुर्का से आज़ादी देने के लिए खूब हल्ला मचाते हैं लेकिन उन्हीं महिलाओं को संसद भवन में घुसने नहीं देते हैं, लेकिन पाकिस्तान हमसे ज़्यादा महिला नेताओं को अपने संसद में घुसने देता है। सिर्फ़ घुसने नहीं देता है बल्कि पाकिस्तान तो महिलाओं को आरक्षण भी देता है। महिला नेता को देश की संसद तक भेजने में पाकिस्तान भारत से कहीं आगे हैं।

2023 में पाकिस्तान के निम्न सदन (यानी की लोकसभा) में 20.46 प्रतिशत सांसद महिला हैं जबकी उच्च सदन में 19.00 प्रतिशत सांसद महिला हैं। दूसरी तरफ़ भारत के लोकसभा में मात्र 14.39 प्रतिशत महिला सांसद हैं और राज्यसभा में मात्र 10.71 प्रतिशत सांसद महिला हैं। पाकिस्तान के 342 सीटों वाले लोकसभा में 60 सीट महिला के लिए आरक्षित है जबकि पाकिस्तान के 2018 के चुनाव में 70 महिला सांसद निर्वाचित होकर संसद पहुँची थी। यानी कि आरक्षित सीट से भी 16.67 प्रतिशत ज़्यादा महिला निर्वाचित होकर पाकिस्तान की संसद तक पहुँची थी। 

आप भारतीय हैं तो अपने नेताओं से सवाल कीजिए कि हम इन माणकों और रैंकिंग में पाकिस्तान से पीछे क्यूँ है और अगर आप पाकिस्तानी है तो गर्व कीजिए, आपके पास भी कुछ तो है जिसमें आप हिंदुस्तान से आगे हैं।

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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