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कब और क्यूँ नेहरू जी ने नंदादेवी पर्वत की तुलना महिला के स्तन से की थी ?

जवाहरलाल नेहरू मेमोरीयल फंड के सहयोग से इतिहासकार एस गोपाल द्वारा संकलित ‘Selected Works of Jawaharlal Nehru’ के आठवें वॉल्यूम में पृष्ट संख्या 874-75 पढ़िए। या फिर मई 1938 में पंडित नेहरू द्वारा मॉडर्न रिव्यू पत्रिका में ‘इस्केप’ नामक शीर्षक से लिखे लेख को पढ़िए। अलमोडा से कुछ ही दूरी पर ख़ली (इस्टेट) से खड़े होकर उत्तर की तरफ़ नंदा देवी पर्वत की तरफ़ झांकते हुए नेहरू लिखते हैं,

“Fierce precipices, almost straight cut, sometimes led to the depths below, but more often the curves of the hillsides were soft and rounded like a women’s breast.” 

चित्र 1: Central Causasus के दोहरी ताज की तरह दिखने वाले Ushba पर्वत जिसकी तुलना Longstaff ने नंदा देवी पर्वत शिखर से किया था।

सुंदरता का प्रतीक

जी हाँ, नेहरू नंदा देवी पर्वत के शिखर की तुलना एक औरत के स्तन से कर रहे हैं। ढूँढने वाले लोग पंडित जी के इस वक्तव्य में अश्लीलता, अधर्मिता, ग़ैर-संस्कारीता और पता नहीं क्या क्या ढूँढ लेंगे। लेकिन मुझे उनके इन शब्दों में उनके प्रकृति, पहाड़, हिमालय के प्रति प्रेम और उस प्रेम के प्रति ईमानदारी और स्वच्छता दिखती है। इन पंक्तियों में मुझे पंडित जी एक कलाकार, कवि और कौतूहल से भरे व्यक्तित्व दिखते हैं। 

वर्ष 1905 में ब्रिटिश पर्वतारोही लॉंग्स्टैफ़ ने भी नंदा देवी पर्वत शिखर की तुलना पूरे विश्व में प्रेम और सुंदरता का प्रतीक ताज महल से किया था।  कई पर्वतों पर अपना झंडा गाड़ने वाले T G Longstaff ने गढ़वाल को पूरे एशिया में स्थित सभी उच्च स्थानो पर बसे स्थानों में से सर्वाधिक खूबसूरत माना। 9 जनवरी 1928 को जीअग्रैफ़िकल जर्नल सोसायटी के एक बैठक में Longstaff, गढ़वाल की शान नंदा देवी पर्वतमाला को विश्व का सर्वाधिक खूबसूरत और कठिन चढ़ाई वाली पर्वत चोटी मानते थे। उन्होंने नंदा देवी की तुलना Central Causasus के दोहरी ताज की तरह दिखने वाले Ushba पर्वत से भी किया था। आज भी खली के स्थानिय लोग नंदा देवी चोटी को ‘स्लीपिंग ब्यूटी’ कहते हैं।

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चित्र 2: वर्ष 1905 में ब्रिटिश पर्वतारोही लॉंग्स्टैफ़ द्वारा लिया गया नंदा देवी पर्वत का चित्र।

नेहरू और पहाड़

पहाड़ों के प्रति पंडित नेहरु के असीम प्रेम और लगाव का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पंडित नेहरु ने जो अपने जीवन में तीन किताबें लिखी उन तीनो किताबों के लिखने का आग़ाज़ इन्हीं पहाड़ों में हुआ था। कहते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंडित नेहरु को जब भी गिरफ़्तार किया जाता था तब वो हमेशा देहरादून या अल्मोडा जेल में सजा काटने की अपनी इच्छा जताते थे। पंडित नेहरु को उत्तराखंड के देहरादून और अल्मोडा जेल में वर्ष 1932, 1933, 1934 और 1941 के दौरन रखा गया था।

पंडित नेहरू को पहाड़ों में उनका नन्हा नाती राजीव (गांधी) नज़र आता था। अपनी पुत्री इंदिरा गंधी को लिखे पत्रों में नेहरू बार बार इंदिरा को हिमालय जाने की सलाह देते हैं। वही हिमालय जो पंडित जी को सिर्फ़ ‘नेहरू’ होने का अहसास दिलाता था और वो चाहते थे कि इंदिरा को भी ये हिमालय सिर्फ़ और सिर्फ़ ‘इंदिरा’ (गंधी) होने का अहसास दिलाता रहे। 

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अल्मोडा जेल जहाँ पंडित नेहरू सजा काट चुके थे
चित्र 3: अल्मोडा। जेल जहाँ पंडित नेहरु स्वतंत्रता आंदोलन के दौरन ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए सजा काट चुके हैं।

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आज हम पहाड़ों में सूचना, संचार, यातायात से लेकर स्वास्थ्य की जर्जरता पर जितना भी सोच रहें हो लेकिन नेहरू पहाड़ के इन सभी समस्याओं के बारे में 1930 के दशक में ही लिख और बोल चुके थे, और उस दयनीयता के लिए स्थानीय कांग्रेस के नेताओं को लताड़ चुके थे। जब वर्ष 1938 के दौरन नेहरु देहरादून से गौचर के रास्ते बद्रीनाथ तक की हवाई यात्रा करते हैं तो पहाड़ों में सड़क की समस्या को सर्वाधिक महत्वपूर्ण समझते हैं और श्रीनगर गढ़वाल शहर में भारत के स्वीटज़रलैंड की सम्भावना को तलासते हैं।

पंडित नेहरु जी द्वारा नंदा देवी पर्वत की तुलना औरतों के स्तन से करना अगर इतिहास की सच्चाई है तो उनके द्वारा उत्तराखंड के पहाड़ों को ख़ूबसूरती का प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना भी इतिहास का हिस्सा है। नेहरु द्वारा सुंदरता की ये तुलना सुंदरता तक ही सीमित रखा जाना चाहिए वर्ना ढूँढने वाले तो काली माता की नग्नता में भी क्रोध के स्थान पर नग्नता ढूँढ सकते हैं।

चित्र 4: पिथौरागढ़ के बेरीनाग से नंदा देवी शिखर। (चित्र साभार: पंकज पंत)

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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