HomeBrand Bihariपटना पुस्तक मेला (Book Fair) का पूरा टाइमलाइन: 1985 से 2023 तक

पटना पुस्तक मेला (Book Fair) का पूरा टाइमलाइन: 1985 से 2023 तक

1985: हालाँकि पहला पटना पुस्तक मेला (Patna Book Fair) आयोजित करने का दावा 1960 के दशक तक जाता है लेकिन अधिकारिक तौर पर पहली बार पटना में पुस्तक मेला साल 1985 में आयोजित किया गया था। यह मेला 2 अक्तूबर से 10 अक्तूबर 1985 को आयोजित किया गया था। इस साल पटना में National Book Trust ने भी मेला आयोजित किया था और CRD (Centre of Readership Development) ने भी अलग मेला आयोजित किया था। 

संसद में पूछे गए एक सवाल के अनुसार पटना के इस पुस्तक मेले के लिए केंद्र सरकार ने 7.6 लाख रुपए का अनुदान दिया था और जिसमें 172 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया था। CRD द्वारा आयोजित मेले का कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है सिवाय इसके कि यह मेला गांधी मैदान में पाँच हज़ार वर्ग फूट क्षेत्र में आयोजित किया गया था जो आज (2019) बढ़कर एक लाख वर्ग किमी तक पहुँच गया है। CRD द्वारा आयोजित पटना पुस्तक मेला का प्रतीक चिन्ह शुरू से लेकर आज तक अप्पू है।  

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लालू राबड़ी राज में पटना पुस्तक मेला:

1988: इस साल नैशनल बुक ट्रस्ट का पुस्तक मेला पटना में नहीं लगा लेकिन CRD का मेला लगा था। इसके बाद फिर साल 1990, 1991 और 1992 में पटना में पुस्तक मेला का आयोजन किया गया। 

1992: साल 1992 का पटना पुस्तक मेला कई मामलों में ख़ास था। इस पुस्तक मेला में प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट लक्ष्मण भी आए थे और उनके साथ Times of India editor-in-chief Dileep Padgaonkar and Arvind Narayan Das आए थे। उस समय 2.5 लाख लोग आए थे और वो पंद्रह दिन तक चला था। इस मेले में 255 प्रकाशक ने भाग लिया था।  उस समय बिहार की साक्षरता दर 38.54% थी। उस समय पहले तीन दिन में 35 लाख की किताबें बिक गई थी। उस पुस्तक मेला का पूरा टर्नओवर दो करोड़ था। जबकि उस समय OGL रेस्ट्रिक्शन के कारण विदेशी प्रकाशक को मेला में आने की इजाज़त नहीं थी।

1992 से 2002: साल 1992 से 2002 के दौरान पटना पुस्तक मेला हर साल नहीं बल्कि हर दूसरे साल लगता था।कुछ लोगों की नज़र में बिहार इस दौरान जंगल राज के दौर से गुजर रहा था। इस दौरान साल 2000 और 2002 का पटना पुस्तक मेला को गांधी मैदान से हटाकर पाटलिपुत्र कॉलोनी में शिफ़्ट कर दिया गया था। 

2004: इस साल लगभग चार सौ किताबों के स्टॉल लगे हैं जो कि पिछले साल 2003 में लगे तीन सौ स्टॉल से ज़्यादा थे। इस साल पाकिस्तानी प्रकाशक भी आमंत्रित किए गए। आयोजकों ने यह भी घोषणा किया था कि साल 2006 में पटना में विश्व पुस्तक मेला आयोजित करने की योजना बना रहे है।

नीतीश राज में पटना पुस्तक मेला:

2005: बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद यह बिहार का पहला पटना पुस्तक मेला था जिसमें लगभग चार लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। यह CRD द्वारा आयोजित 21वाँ पटना पुस्तक मेला था। मेला का उद्घाटन जस्टिस J N भट्ट ने किया था। आयोजकों का दावा था कि लगभग एक दर्जन प्रकाशक जो पिछले एक दशक से पटना पुस्तक मेले में नहीं आ रहे थे वो भी इस मेले में हिस्सा लेने आए थे। इस मेले का टिकट तीन रुपए का था जो कि कॉलेज या स्कूल के छात्रों को माफ़ था। 

2006: इस पुस्तक मेले में रुस का Katman Group प्रकाशक भी भाग लिया और पाकिस्तानी का प्रकाशक भी हिस्सा लिया था। इस मेला में ADG अभयानंद जी ने “अपराध और समाज” विषय पर परिचर्चा किया। इसके साथ साथ ADRI के निर्देशक साईबाल गुप्ता ने भी हिस्सा लिया  और “कितना बदल रहा है बिहार” विषय पर चर्चा किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद पहली बार पटना पुस्तक मेला का उद्घाटन करने आए थे। 

2007 के पटना पुस्तक मेले का भी उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही करने आए थे और उसमें उन्होंने। इस साल प्रतिदिन पंद्रह से बीस लाख की किताब बिकी थी। 570 स्टॉल और 225 प्रकाशक ने हिस्सा लिया जिसमें बारह दिनों के दौरान 8.44 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। 

2008: नीतीश कुमार उद्घाटन करने आए थे, जिसमें उन्होंने घोषणा किया कि उनकी सरकार ने स्कूल और कॉलेज को बीस करोड़ रुपए का अनुदान दिया और स्कूल और कॉलेज प्रशासन को पटना पुस्तक मेले से किताब ख़रीदने का निर्देश भी दिया। फ़िल्म की दुनियाँ से प्रकाश झा के साथ साथ सभी फ़ील्ड के प्रसिद्ध लोगों ने मेला में हिस्सा लिया। इस इस पुस्तक मेले में लगभग 600 प्रकाशकों के 615 स्टॉल लगे जिसमें अमरीका, ब्रिटेन, सिंगापुर से आए हुए प्रकाशक भी थे। 12 दिन के इस मेले में लगभग 8-10 लाख लोग आए।

Patna Book Fair
Table: Year wise total turnover of people and financial turnover along with number of stalls in Patna book fair.

इसे भी पढ़े: वर्ष 1912 में पटना नहीं, इस शहर को भी बिहार की राजधानी बनाने का प्रस्ताव था।

2009: इस मेले की सबसे बड़ी सुर्ख़ी थी बिहार के प्रसिद्ध प्रेमी प्रफ़ेसर मटुकनाथ की किताब। इस मेले में सबसे ज़्यादा किताब मटुकनाथ की डायरी पर लिखी गई किताब (मटुक जूली की डायरी दो भागों में) ही बिकी थी। इनकी यह किताब अगले साल 2010 के पटना पुस्तक मेला में भी खूब सुर्ख़ियाँ बटोरा था। इस साल भी बिहार सरकार ने बिहार के लगभग तीन हज़ार विद्यालयों को किताब ख़रीदने के लिए 63 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान दिया था।

2010: दावे के अनुसार साल 2010 में आयोजित पटना पुस्तक मेले में लगभग 5 करोड़ की किताब बिकी थी। इस मेले में सबसे ज़्यादा किताब बिकी थी मटुकनाथ की डायरी पर लिखी गई किताब (मटुक जूली की डायरी दो भागों में) 

2013: एक दावे के अनुसार इस साल पटना पुस्तक मेले में लगभग सात करोड़ की किताबें बिकी थी। यह पुस्तक मेला अखंड रूप से राजनीतिक रहा और पूरे मेले के दौरान दो सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक थी नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के जीवन पर लिखी दो किताबें। अगले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में तो मोदी जी ने नीतीश कुमार को हरा दिया था लेकिन किताब के मामले में मोदी जी की किताब से ज़्यादा किताब नीतीश कुमार के जीवन पर लिखी किताब बिकी थी। 

2014: एक दावे के अनुसार 2014 के पटना पुस्तक मेला में 8 लाख लोग आए और जीतन राम माँझी उद्घाटन करने आए थे, मंजी जी ने पटना पुस्तक मेला को विश्व पुस्तक मेला का दर्जा दिलवाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह भी किया था। 250 प्रकाशकों के 700 स्टॉल से 7 लाख किताबें बिकीं और मेले का पूरा टर्न ओवर लगभग छह से सात करोड़ की थी। हालाँकि एक दूसरे खबर के अनुसार मेले का पूरा टर्नओवर आठ करोड़ तक पहुँच गया था।

2015: 

2015 में लगभग 6 करोड़ की किताब बिकी और पाँच लाख लोग मेला देखने आए थे। इस साल कई ऐसी गतिविधियाँ की गई थी जो इसके पहले कभी नहीं की गई थी।  इस साल फिर से नरेंद्र मोदी के जीवन पर लिखी किताब से ज़्यादा किताब नीतीश कुमार के जीवन पर लिखी किताब बिकी थी। यह पुस्तक मेला उस माहौल में हुआ था जब लोकसभा चुनाव जितने वाले भाजपा को नीतीश कुमार और लालू यादव की महागठबँधन को धूल चटा दिया गया था। सरकार और आयोजकों के बीच इस साल मेला के स्थान, तिथि, NBT आयोजन आदि को लेकर इस साल कई विवाद शुरू हुए।

इस मेले में एक और विवाद ये हुआ कि CRD द्वारा आयोजित पटना पुस्तक मेला के आयोजकों ने आरोप लगाया कि इस साल पिछले साल से कम लोग मेला देखने इसलिए आए क्यूँकि पटना पुस्तक मेले के नाम से ही पटना में दो अन्य पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था जिसके कारण आम लोगों में कन्फ़्यूज़न पैदा हुआ। CRD का कहना था कि पिछले साल तक नैशनल बुक ट्रस्ट अपने मेले का नाम राष्ट्रीय पुस्तक मेला रखते थे लेकिन इस साल CRD द्वारा पटना पुस्तक मेला आयोजित करने से पहले ही नैशनल बुक ट्रस्ट ने नवम्बर में ही पटना पुस्तक मेला के नाम से पटना में पुस्तक मेला का आयोजन कर दिया।

2017: 

2017 में नैशनल बुक ट्रस्ट ने भी पटना में सात दिनों का राष्ट्रीय पुस्तक मेला का आयोजन किया था अपने साठ साल पूरा होने के अवसर पर। लेकिन इस मेले में मात्र तीन लाख की किताब बिकी थी। 

लेकिन CRD द्वारा आयोजित 2017 के पटना पुस्तक मेला का उद्घाटन खुद नीतीश कुमार करने आए थे और उस कार्यक्रम में उन्होंने बोला था कि पटना पुस्तक मेला दिल्ली और कलकत्ता के बाद तीसरा सबसे प्रसिद्ध पुस्तक मेला है और ये मेला विश्व का भी दस प्रमुख पुस्तक मेलों में से एक है। ये मेला सम्राट अशोक कन्वेन्शन सेंटर में हुआ था और यह मेला दिसम्बर के बजाय 04 जनवरी को शुरू हुआ था। इस मेले में मात्र 112 प्रकाशकों के 150 स्टॉल लगे थे और पहले एक हफ़्ते के दौरान मात्र 13500 टिकट ही बिक था। 

इसे भी पढ़े: कलकत्ता वाली ट्राम-सेवा, 19वीं सदी में पटना की सड़कों पर भी दौड़ती थी

2018 में यह मेला हुआ ही नहीं। पहले तो तय हुआ कि ये सम्राट अशोक कन्वेन्शन सेंटर में होगा लेकिन बाद में आयोजकों ने पैसे की कमी का हवाला देकर इसे रद्द कर दिया। आयोजकों ने यह भी कहा कि अगले साल भी मेला होने की सम्भावना नहीं है। ये कोई पहली बार नहीं था जब पटना पुस्तक मेला का आयोजन स्थान बदला गया था। साल 1999 से 2002 (2000 और 2002) के दौरान भी पटना पुस्तक मेला का आयोजन स्थान बदल दिया गया था जब इसे पाटलिपुत्र कॉलोनी के मैदान में शिफ़्ट कर दिया गया था।

2019: इस साल पटना पुस्तक मेला को फिर से गांधी मैदान में जगह दे दी गई। अमूमन पटना पुस्तक मेला दिसम्बर के पहले हफ़्ता या नवम्बर के आख़री हफ़्ते में शुरू होता था लेकिन इस साल यह मेला 8 से 18 नवम्बर तक चला था। इस मेले में सरकारी स्कूल और कॉलेज के छात्रों का तो एंट्री फ़्री रहा लेकिन निजी विद्यालयों या कॉलेज के छात्रों का एंट्री फ़्री नहीं था और छात्रों के लिए ये मुफ़्त एंट्री सिर्फ़ सोमवार से शुक्रवार तक ही था और वो भी ड्रेस और पहचान पत्र के साथ। 

2020 और 2021:  2019 के बाद 2020 और 2021 के दौरान कोविड के कारण पटना पुस्तक मेला का आयोजन नहीं हुआ।  

2022: 

पिछले साल 2022 के पटना पुस्तक मेला में लगभग तीन लाख लोगों का आगमन हुआ था और मात्र। 60 प्रकाशक ही हिस्सा लिए थे। पटना पुस्तक मेला अपनी निरंतरता तो बनाए हुए है लेकिन मेला में आने वाले लोगों और प्रकाशकों के साथ साथ विद्वानों की संख्या भी खो रहा है। इस साल 2023 में भी आयोजन हुआ है अब देखना है कि इस साल कितने लोग पटना पुस्तक मेला में आते हैं और कितना किताब बिकता है। 

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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