HomeCurrent Affairsहिंदू-मुस्लिम के नाम पर School की छुट्टियों का बँटवारा-2

हिंदू-मुस्लिम के नाम पर School की छुट्टियों का बँटवारा-2

बिहार में विपक्ष (NDA) सरकार पर यह आरोप लगा रही है कि बिहार के सरकार स्कूलों में हिंदू त्योहारों की छुट्टियों को कम करने और मुस्लिम त्योहारों की छुट्टियाँ बढ़ाने के साथ साथ हिंदू और मुस्लिम के लिए अलग अलग छुट्टी की सूची जारी करके मुस्लिमों का तुष्टिकरण भी कर रही है और धर्म-निरपेक्ष राष्ट्र भारत और भारत के धर्म-निरपेक्ष संविधान की धज्जियाँ भी उड़ा रही है। 

धर्म के हिसाब से त्योहार की छुट्टियों का बँटवारा करने से कोई सरकार हिंदू विरोधी या हिंदुवादी हो सकती है तो यह ज़रूरी है कि यह पता किया जाए कि हिंदुस्तान के अलग अलग राज्यों में किस किस हिंदू और किस किस मुस्लिम धर्म के त्योहारों की छुट्टी होती है और उस छुट्टी देने के पैमाने पर हिंदुस्तान का कौन सा राज्य सबसे ज़्यादा हिंदू है और कौन सा राज्य सबसे ज़्यादा मुस्लिम है। लेकिन यह समझने से पहले ये समझ लेते हैं कि ये पूरा मामला है क्या?

सिमटती छुट्टियाँ:

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने साल 2024 के दौरान विद्यालयों में होने वाली छुट्टियों की सूची जारी किया। इसके पहले इसी साल अगस्त महीने में विभाग ने त्योहारों के मौसम यानी की सितम्बर, अक्तूबर और नवम्बर महीने के दौरान स्कूलों में होने वाली छुट्टीयों की संख्या 23 से घटाकर 11 कर दिया था, यानी कि कुल 12 छुट्टियों को कम कर दिया गया था। जैसे अगस्त में विपक्ष ने बिहार सरकार को हिंदू विरोधी बता दिया था इस बार फिर से विपक्ष बिहार सरकार को हिंदू विरोधी बता रही है। 

हालाँकि बिहार सरकार और उसका शिक्षा विभाग स्पष्टीकरण दे चुकी है कि बिहार में पहले भी यानी कि साल 2023 के दौरान भी 60 छुट्टियाँ थी और अब साल 2024 के दौरान भी बिहार के स्कूलों में 60 छुट्टियाँ ही रहेगी। लेकिन विपक्ष बिहार सरकार पर आरोप लगा रही है कि बिहार सरकार ने हिंदू त्योहारों की छुट्टी को कम कर दिया है लेकिन मुस्लिम त्योहारों की छुट्टी को बढ़ा दिया। 

जब सरकार ने फिर से ये स्पष्ट किया कि हिंदू बहुल विद्यालयों के लिए अलग छुट्टी सूची जारी की गई है और मुस्लिम बहुल विद्यालयों के लिए अलग छुट्टी सूची जारी की गई है तब विपक्ष और भी अधिक भड़क गई और कहने लगी कि धर्म के हिसाब से अलग अलग छुट्टी की सूची जारी करना भारत जैसे धर्म-निरपेक्ष देश में ग़ैर-संवैधानिक कदम है। 

केंद्रीय विद्यालय में छुट्टियाँ:

पर सवाल उठता है कि अगर अलग अलग धर्म के छात्र बहुल विद्यालय में अलग अलग छुट्टी की सूची जारी करना ग़ैर-संवैधानिक है तो फिर एक ही केंद्र सरकार द्वारा संचालित देश के अलग अलग हिस्सों में स्थित अलग अलग केंद्रीय विद्यालय में अलग अलग त्योहारों की छुट्टी क्यूँ होती है। केंद्र सरकार द्वारा ही संचालित अलग अलग विश्वविद्यालय, ITT,  और IIM में अलग अलग दिन छुट्टी क्यूँ होती है? और अलग अलग राज्यों के विद्यालयों में अलग अलग दिन छुट्टी क्यूँ होती है? 

उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल के केंद्रीय विध्यालय में राम नवमी की छुट्टी नहीं है लेकिन कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में राम नवमी की छुट्टी है। कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में जमात उल विदा की छुट्टी है लेकिन पश्चिम बंगाल के केंद्रीय विद्यालय में इस दिन छुट्टी नहीं है। कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में करवा चौथ की छुट्टी है लेकिन बंगाल के केंद्रीय विद्यालय में नहीं है। कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में रक्षा बंधन की छुट्टी नहीं है और जन्माष्टमी की एक दिन की छुट्टी है। तो दूसरी तरफ़ पश्चिम बंगाल के केंद्रीय विद्यालय में जन्माष्टमी की तो छुट्टी नहीं है लेकिन रक्षा बंधन की छुट्टी है।

पश्चिम बंगाल के केंद्रीय विध्यालय में हिंदू त्योहार होली की दो की छुट्टी है लेकिन कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में होली की मात्र एक दिन की छुट्टी है। कर्नाटक के केंद्रीय विद्यालय में दशहरा की एक दिन की छुट्टी है तो बंगाल के केंद्रीय विद्यालय में दो दिन की छुट्टी है। इसी तरह से बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी उत्तर प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों में तो है लेकिन न तो पश्चिम बंगाल के केंद्रीय विद्यालय में बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी हैं और न ही कर्नाटक के विद्यालय में बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी है। देश के अलग अलग केंद्रीय विद्यालय में गर्मी की छुट्टी या सर्दी की छुट्टी का समय अलग अलग होती है।

इसे भी पढ़े: ‘बिहार सरकार में छुट्टी कम : योगी राज और गुजरात मॉडल में कितनी छुट्टियाँ मिलती है ?’

लेकिन इन अंतरों के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा संचालित सभी केंद्रीय विद्यालयों में एक एकता ज़रूर है कि चाहे किसी भी राज्य का केंद्रीय विद्यालय हो सभी जगह पूरे साल कुल 22 छुट्टी ही मिलती है और उन 22 छुट्टी में से सभी केंद्रीय विद्यालय में पाँच-पाँच ऐच्छिक छुट्टी है और बाक़ी का 18-18 अनिवार्य छुट्टी मिलती है। 

इसी तरह से केंद्र सरकार द्वारा ही संचालित और उत्तर प्रदेश में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिवाली और दसहरा की तीन तीन दिन की छुट्टी मिलती है लेकिन यहाँ न तो भैया दूज की छुट्टी मिलती है और न ही गोवर्धन पूजा की या न ही तीज या जितिया की छुट्टी मिलती है। दूसरी तरफ़ IIT वाराणसी में दिवाली और दसहरा में मात्र एक एक दिन की छुट्टी मिलती है जबकि भैया दूज, गोवर्धन पूजा, तीज या जितिया का एक भी दिन का छुट्टी नहीं मिलता है। 

लेकिन उसी उत्तर प्रदेश में जहां बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और IIT वाराणसी स्थित है, और जहां भैया दूज, गोवर्धन पूजा, तीज या जितिया की छुट्टी नहीं मिलती है उसी उत्तर प्रदेश में स्थित राज्य सरकार द्वारा संचालित विद्यालयों और विश्व विद्यालयों में जन्माष्टमी की भी छुट्टी मिलती है और गोवर्धन पूजा की भी छुट्टी मिलती है, और उसके ऊपर से भैया दूज की भी छुट्टी मिलती है जबकि ये तीनो छुट्टी उत्तर प्रदेश में ही स्थित न तो केंद्रीय विद्यालय में होती है और न ही उत्तर प्रदेश में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में होती है। 

कहाँ के हिंदू, कहाँ के मुस्लिम:

इसी तरह से देश के अलग-अलग राज्य में स्थित राज्य सरकार के स्कूलों में अलग अलग दिन छुट्टी होती है। उदाहरण के लिए बिहार में छठ पूजा में तीन दिनों की छुट्टी होती है लेकिन उत्तर प्रदेश में छठ पूजा की मात्र एक दिन छुट्टी होती है और वो भी ऐच्छिक छुट्टी होती है, अनिवार्य नहीं। इसी तरह से राम की जन्मभूमि उत्तर प्रदेश में राम नवमी के दिन छुट्टी दी जाती है तो बिहार में राम नवमी को छुट्टी न देकर जानकी दिवस की छुट्टी दी जाती है क्यूँकि बिहार माता सीता की जन्म भूमि है। इसी तरह से बिहार में छठ पूजा की छुट्टी सबसे ज़्यादा है क्यूँकि छठ पूजा बिहार का सबसे प्रसिद्ध त्योहार माना जाता है। 

इसी तरह कृष्ण की नगरी मथुरा वाले उत्तर प्रदेश में गोवर्धन पूजा की भी छुट्टी होती है और कृष्ण जन्‍माष्‍टमी की भी छुट्टी होती है लेकिन बिहार में सिर्फ़ कृष्ण जन्‍माष्‍टमी की एक दिन की छुट्टी होती है। इसी तरह से दिवाली में गुजरात में 21 दिन की छुट्टी होती है, मध्य प्रदेश में साथ दिन की, और उत्तर प्रदेश और बिहार दोनो जगह मात्र एक दिन की छुट्टी होती है। दुर्गा पूजा में दिल्ली में दस दिन की बिहार में तीन दिन की, उत्तर प्रदेश में दो दिन की और गुजरात में मात्र एक दिन की छुट्टी है। 

अगर बिहार सरकार का शिक्षा विभाग हिंदू पर्व राम नवमी, रक्षा बंधन, और गोवर्धन पूजा की छुट्टी नहीं देकर हिंदू विरोधी हो जाती है तो फिर केंद्र सरकार के केंद्रीय विद्यालयों में महाशिवरात्रि, रक्षा बंधन, राम नवमी, अनंत पूजा, जितिया, गोवर्धन पूजा और भई दूज का छुट्टी नहीं होना किस हिंदू राष्ट्र की पहचान है? बिहार में रविदास जयंती और कबीर जयंती की छुट्टी होती है परन्‍तु उत्तरप्रदेश और केन्‍द्र सरकार के केव्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों में इन दोनो में से एक भी दिन छुट्टी नहीं होती है तो क्‍या उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार दलित विरोधी हैं?

गांधी जयंती:

सवाल तो ये भी उठाया गया कि बिहार सरकार ने गांधी जयंती समेत कई महापुरुषों के जयंती और पुण्य तिथि की भी छुट्टी ख़त्म कर दी है। लेकिन इसी हिंदुस्तान के आसाम राज्य में न सिर्फ़ गांधी जयंती बल्कि स्वतंत्रता दिवस, और यहाँ तक कि गणतंत्र दिवस को भी विद्यालय में छुट्टी नहीं होती है क्यूँकि उस दिन विद्यालय में कार्यक्रम होता है। इस दिन स्कूल में पढ़ाई नहीं होता है लेकिन बच्चे और शिक्षक दोनो स्कूल आते हैं और गांधी जयंती, स्वतंत्रता दिवस, और गणतंत्र दिवस मनाते हैं। इसी तरह से असाम में 9 मई को रविंद्र जयंती दिवस और 17 जनवरी को शिल्पी दिवस मनाया जाता है। 

बिहार सरकार जो अलग अलग हिंदू त्योहारों की छुट्टियाँ कम कर रही है उसके पीछे सरकार द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि भारत सरकार के शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत यह अनिवार्य है कि देश के सभी विद्यालय कम से कम 220 दिन खुले।  इसी क़ानून के तहत दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों के स्कूलों में भी दूसरा शनिवार, और अंतिम कार्य-दिवस की छुट्टी को रद्द कर दिया गया  थी। 

लेकिन सवाल उठता है कि एक साल में कुल 365 दिन होता है। और उस 365 दिनों में से साल के कुल 52 या 53 रविवार होता है, बाक़ी का बचा 312 दिन अब उसमें से भी 60 दिन जो बिहार सरकार छुट्टी दे रही है उसे घटा दीजिए फिर भी बचा 252 दिन, अब इस 252 दिन में से 220 दिन विद्यालय खोलना है तो फिर बाक़ी का 32 दिन कहाँ गया? इन 32 दिनों के दौरान बिहार सरकार शिक्षकों से क्या करवाती है? 

ये 32 दिन बिहार सरकार शिक्षकों से कभी जातीय गणना करवाती है, कभी शराब बंदी के लिए सर्वे करवाती है। तो बिहार सरकार का ये तर्क कि छुट्टियों को कम इसलिए किया जा रहा है क्यूँकि शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत 220 दिन विद्यालय खोलना ज़रूरी है इसलिए बिहार में छुट्टियों की संख्या कम की जा रही है ये तर्क तार्किक नहीं लगता है। 

हिंदू-मुस्लिम छुट्टियाँ:

हिंदू और मुस्लिम बहुल विद्यालयों के लिए अलग अलग अवकाश सूची जारी करने के पीछे बिहार का सत्ता पक्ष यह तर्क दे रही है कि बिहार में हिंदू और मुस्लिम बहुल विद्यालयों के लिए अलग अलग अवकाश सूची जारी करने का नियम साल 2019 में बनाया गया था जब बिहार में NDA की सरकार थी, मतलब भाजपा के साथ गठबंधन वाली सरकार थी इसलिए अब जब भाजपा सरकार में नहीं है तो उसे इस नियम पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्यूँकि यह नियम भाजपा गठबंधन वाली बिहार सरकार ने ही बनाया था। 

दरअसल सत्ता पक्ष जिस 2019 के शिक्षा विभाग के नियम की बात कर रही है वो नियम नहीं बल्कि बस एक आदेश है जो शिक्षा विभाग ने 22 जुलाई 2019 को जारी किया था और जिसमें ज़िक्र किया गया है कि बिहार शिक्षा संहिता की धारा 265 (5) के तहत यह आदेश दिया गया था कि बिहार के मुस्लिम बहुल विद्यालयों जिसकी पूरे बिहार में कुल संख्या 4167 है, इन विद्यालयों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा सकती है। और इसी बिहार शिक्षा संहिता की धारा 265 (5) के तहत बिहार सरकार का शिक्षा विभाग ने हिंदू और मुस्लिम बहुल विद्यालयों के लिए अलग अलग अवकाश सूची जारी किया है। 

हालाँकि यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि बिहार शिक्षा संहिता की धारा 265 (5) साल 2019 में नहीं बनाया गया था बल्कि साल 1961 में बनाया गया था और उस बिहार शिक्षा संहिता 1961 के धारा 265 (5) के तहत जुलाई 2019 में शिक्षा विभाग द्वारा एक फ़ैसला लिया गया था कि मुस्लिम बहुल विद्यालयों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी होगी और उसी बिहार शिक्षा संहिता 1961 के धारा 265 (5) के तहत नवम्बर 2023 में बिहार शिक्षा विभाग द्वारा यह फ़ैसला लिया गया कि हिंदू बहुल विद्यालयों में अवकाश की अलग सूची होगी और मुस्लिम बहुल विद्यालयों में अवकाश की अलग सूची होगी। 

2019 में भाजपा और नीतीश कुमार की NDA वाली सरकार थी और 2023 में लालू यादव और नीतीश कुमार वाली महगठबँधन की सरकार थी।  विद्यालयों की छुट्टी को धर्म के आधार पर बाटना किसने शुरू किया और किसने इसे आगे बढ़ाया या फिर क्या इस तरह से धर्म के आधार पर विद्यालयों की छुट्टी को धर्म के आधार पर बाटना सही है या ग़लत है ये आप तय कीजिए। 

लेकिन फ़िलहाल बिहार के नव निर्वाचित शिक्षकों को यह अधिकार नहीं है कि वो बिहार के विद्यालय व्यवस्था में क्या ग़लत है और क्या सही है ये तय कर सके, और तय भी करते हैं तो यह तो बिल्कुल बिहार के शिक्षकों को अधिकार नहीं है कि उन्होंने जो भी तय किया है या अपना मत बनाया है उस मत के अनुसार अपने आप को संगठित कर सकें या सरकार के ख़िलाफ़ कुछ बोल सके। 

11 नवम्बर 2023 को बिहार शिक्षा विभाग ने एक पत्र जारी किया जिसमें Bihar Government Servant Code of Conduct 1976 के तहत  बिहार Code of Conduct of Bihar School Teachers Rules 2023 के पैरग्रैफ़ 7 के सेक्शन 17 को इंगित करते हुए बिहार में BPSC द्वारा नियुक्त सभी शिक्षकों को यह फ़रमान जारी किया कि अगर कोई नव नियुक्त शिक्षक अपने आप को संगठित करने के लिए अगर कोई संस्था बनाने का प्रयास करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही की जाएगी। 

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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