HomeCurrent AffairsForced Marriage: पकडुआ विवाह पर पत्राकर महोदय का अधकचरा ज्ञान

Forced Marriage: पकडुआ विवाह पर पत्राकर महोदय का अधकचरा ज्ञान

पकडुआ विवाह पनौती:

09 नवम्बर 2023 को जब पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार डेढ़ लाख BPSC शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बाँट रहे थे तो उसमें एक नाम वैशाली के गौतम कुमार का भी था। गौतम बाबू के दादाजी राजेंद्र राय बड़ा आस से अब नौकरी वाले पोता का विवाह करने का लड्डू बनाने लगे, सपना तो था कि अब जमकर दहेज भी लिया जाएगा, AC, कूलर और कुकर के ऊपर कुकर में खाना बनाने वाली सुशील सुंदर सुकन्या पूतहु भी आएगी। लेकिन बेचारे दादाजी को क्या पता था, कि पकडुआ विवाह नाम का पनौती आएगा और दादाजी के सारे ख़्वाब पर ग्रहण लगा जाएगा। 

आपको तो पता होगा कि पकडुआ विवाह नाम का पनौती क्या होता है लेकिन इस पनौती के बारे में न तो भारत सरकार को कुछ पता है, न भारतीय क़ानून मतलब IPC को और न ही भारत में अपराध का आँकड़ा इकट्ठा करने वाले NCRB को कुछ पता है। लेकिन मास्टर साहेब के दादाजी को पता था कि पकडुआ विवाह का पनौती उनके पोते को कहाँ लेकर गया है, इसलिए हाय-बाई में दादाजी पहुँचे पातेपुर थाना, थाना के दरोग़ा बाबू भी ऐक्टिव हो गए और चोबिस घंटा के भीतर गौतम कुमार को पकडुआ विवाह के पनौती से छुड़ाकर ले आए और दादाजी को सौंप दिए।

लेकिन अब दारोगाजी इस घटना को अंजाम देने वलों को सजा किस क़ानून के तहत दें? क्यूँकि भारतीय क़ानून में लड़की का अपहरण करके विवाह करने वलों के ख़िलाफ़ सजा देने का प्रावधान तो धारा 366 के तहत है लेकिन किसी लड़के को अपहरण करके ज़बरदस्ती पकडुआ विवाह करने वलों को सजा देने का कोई प्रावधान है ही नहीं।

बिहार का पकड़ुआ विवाह (Forced Marriage) के भ्रामक आंकड़े और NCRB | News Hunters |
पत्रकार महोदय का पोंगापंती:

उधर दूसरी तरफ़ पटना से लेकर दिल्ली तक के पत्रकार महोदय एक्टिव हो गए और गौतम कुमार के साथ साथ पकडुआ विवाह की और भी पुरानी कहानियों का आँकड़ा देने लगे। इंडिया टुडे , टाइम्ज़ ओफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्ज़, न्यू इंडीयन इक्स्प्रेस, इंडीयन इक्स्प्रेस, द हिंदू जैसे बड़े बड़े अख़बार पत्रिका के बड़े बड़े पत्रकार महोदय पहले भी कई बार पकडुआ विवाह का ग़लत आँकड़ा दे चुके थे।

उदाहरण के लिए इंडिया टुडे में 04 जून 2017 को छपे इस खबर के अनुसार साल 2016 में बिहार में कुल 3075 लड़कों का पकडुआ विवाह हुआ था। ऐसे ही हिंदुस्तान टाइम्ज़, के एक खबर के अनुसार साल 2017 में कुल 8972 पकडुआ विवाह हुआ था लेकिन उसी 2017 में न्यू इंडीयन इक्स्प्रेस के अनुसार कुल 3405 पकडुआ विवाह हुआ था। मतलब दो अलग अलग अख़बार एक ही साल में होने वाले पकडुआ विवाह का दो अलग अलग डेटा दे रहा है और दोनो के आँकड़े में दो चार का अंतर नहीं है बल्कि बहुत बड़ा अंतर है। कहाँ 8972 और कहाँ 3405।

एक खबर यह दावा करता है कि हिंदुस्तान में प्रति दिन 7 पकडुआ विवाह होता है और दूसरा दावा करता है कि प्रति दिन 70 पकडुआ विवाह होता है, लेकिन इंडिया टुडे का, 3075 वाला आँकड़ा, या हिंदुस्तान टाइम्ज़ का 8972 वाला आँकड़ा, या न्यू इंडीयन इक्स्प्रेस का 3405 वाला आँकड़ा (2017) कहाँ से आया, इसकी खबर NCRB तक को नहीं है। क्यूँकि NCRB पकडुआ विवाह का कोई डेटा का गणना करती ही नहीं है, क्यूँकि IPC में पकडुआ विवाह का FIR दर्ज करने के लिए कोई IPC धारा है ही नहीं। और जब IPC में धारा ही नहीं है तो फिर NCRB रिपोर्ट कहाँ से बनाएगी? 

कुछ रिपोर्ट तो सभी तरह के जबरन विवाह को पकडुआ विवाह समझ लेते है लेकिन वहाँ भी जोड़ गुना घटा में गलती कर बैठते हैं। उदाहरण के लिए इंडिया टुडे का साल 2016 का 3075 वाला पकडुआ विवाह का आँकड़ा ही देख लीजिए। जब आप NCRB की साल 2016 की रिपोर्ट देखेंगे तो ऐसा कोई डेटा है ही नहीं।

NCRB के 2016 के रिपोर्ट के अनुसार उस साल बिहार में कुल 7324 अपहरण की घटनाएँ हुई थी, लेकिन इसमें हर तरह का अपहरण शामिल था, लड़की का लड़का का, बिवाह के लिए, फिरौती के लिए, हर तरह का अपहरण शामिल था इसमें। इसमें से 4323 अपहरण लड़कियों का शादी के लिए हुआ था लेकिन शादी के लिए लड़कों का कितना अपहरण हुआ था (पकडुआ विवाह) इसका कोई डेटा NCRB की रिपोर्ट में है ही नहीं। लेकिन पत्रकार महोदय इसमें से पकडुआ विवाह मतलब लड़का को चुराकर शादी करने वाला डेटा कहाँ से निकल लिए ये NCRB को भी कानो कान खबर नहीं हुई।

अगर पत्रकर महोदय लड़का और लड़की दोनो के अपहरण करके ज़बरदस्ती विवाह करने वाले सभी मामलों को पकडुआ विवाह समझते हैं तो फिर भी अकेले ऐसी महिलाओं की संख्या बिहार में साल 2016 में 4323 है तो फिर ये 3075 कहाँ से आया?अगर पत्राकर महोदय अपने लेख में NCRB के रिपोर्ट का तालिका संख्या, रिपोर्ट का पेज संख्या दे देते तो फिर भी समझ में आता कि कहाँ से ये आँकड़ा लाए है महोदय। लेकिन न्यूज़ हंटर्ज़ आपको सब कुछ देगा, तालिका संख्या भी देगा और पेज नम्बर  भी देगा।

NCRB हर साल पूरे भारत में अलग अलग तरह के कितने अपराध होता है उसका पूरा रिपोर्ट जारी करती है। ये रिपोर्ट तीन खंड में होता है और एक एक खंड लगभग लगभग पाँच पाँच सौ पेज का होता है। उसके ऊपर से दो चार सो पेज का अलग से डेटा होता है। मतलब मिला जुलाकर NCRB हर साल लगभग दो हज़ार पेज का रिपोर्ट तैयार करती है भारत में होने वाले अलग अलग अपराधों का ब्योरा के साथ। इसके अलावा NCRB सभी राज्यों का अलग अलग रिपोर्ट भी जारी करती है। लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि NCRB के किसी भी रिपोर्ट में एक बार भी कहीं पर भी पकडुआ विवाह का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है। 

हमने NCRB के एक एक रिपोर्ट का एक एक पेज देखा, पकडुआ विवाह शब्द की जगह क्या पता इस तरह के विवाह के लिए किसी दूसरे शब्द का इस्तेमाल किया हो NCRB ने। हमें जो एक शब्द NCRB के रिपोर्ट में मिला वो था Forced Marriage के लिए अपहरण, मतलब जबरन विवाह करने के लिए किया गया अपहरण। लेकिन NCRB में जबरन विवाह के लिए अपहरण का जो आँकड़ा मिला वो आँकड़ा सिर्फ़ औरतों का था मर्दों का नहीं।

उदाहरण के लिए साल 2021 के NCRB के रिपोर्ट में बिहार में कुल 6589 ऐसी घटनाएँ हुई जिसमें 6608 लड़कियों का शादी करने के लिए अपहरण किया गया। और ये आप NCRB की रिपोर्ट के टेबल नम्बर 1.2 में या फिर टेबल नम्बर 1A.4 में खुद देख सकते हैं, जिसमें ये भी बताया गया है कि बिहार में शादी के लिए लड़कियों को अपहरण करने की सबसे ज़्यादा 486 घटनाएँ मुज़फ़्फ़ापुर ज़िले में हुई थी, उसके बाद वैशाली में 401 और पटना में 387 ऐसी घटनाएँ हुई थी। ये ज़िला वाला डेटा आपको राज्य वाले रिपोर्ट मतलब Crime in Bihar रिपोर्ट के 1A.4 टेबल में मिलेगा।

बिहार में हुए कुल 6589 घटनाओं में से 2905 ऐसे केस थे जहां लड़की कि उम्र 18 साल से कम की थी और 3684 (3A.2-i) केस में लड़कियों की उम्र 18 साल से अधिक थी। इसी साल कुल 3734 विक्टिम यानी की पीड़ित को पुलिस ने बरामद भी किया और उसमें से मात्र 68 पुरुष थे जो कि सम्भवतः लड़की के साथ अपहरण होने वाला भाई या परिवार का कोई और सदस्य हो सकता है। (राज्य वाला Table 2A.3) जो राज्य सरकार के वेब्सायट https://scrb.bihar.gov.in पर आप देख सकते हैं और राष्ट्रीय डेटा को आप ncrb.gov.in पर पढ़ सकते हैं। 

अब ये समझ लीजिए कि दोनो रिपोर्ट में, राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दोनो रिपोर्ट में किसी राज्य में कितनी लड़कियों को अपहरण करके जबरन विवाह हुआ है ये आँकड़ा तो NCRB के दोनो रिपोर्ट में दिया गया है लेकिन ये आँकड़ा कहीं नहीं दिया गया है कि किसी राज्य में कितने लड़कों को अपहरण करके जबरन विवाह कर दिया गया है। कुल कितने लड़कों का अपहरण हुआ है ये आँकड़ा तो दिया हुआ है लेकिन ये आँकड़ा कहीं नहीं है कि सिर्फ़ शादी करने के मक़सद से कितने लड़कों का अपहरण हुआ था।

ये आँकडें इसलिए नहीं उपलब्ध है क्यूँकि क़ानून की कोई ऐसी धारा ही नहीं है जिसके तहत ऐसा कोई केस दर्ज किया जाए कि शादी के लिए किसी लड़के का अपहरण हो गया हो, और जब ऐसे मामलों (पकडुआ विवाह) के लिए कोई क़ानून की धारा ही नहीं है तो फिर रेकर्ड कहाँ से आएगा? ऐसे मामलों में जब विवाह के लिए किसी लड़के का अपहरण हुआ हो तो पुलिस साधारण अपहरण के क़ानून के तहत FIR करती है। इसलिए शादी के लिए मर्दों का अपहरण और फिरौती आदि किसी और मक़सद से किया गया मर्दों का अपहरण वाला केस मिक्स हो जाता है एक दूसरे में।

आप भी ऐसी खबरें और कहानियाँ तो खूब सुने होंगे की फलनवा का बेटा को चुराकर फलनवा के बेटी के साथ ज़बरदस्ती शादी कर दिया गया लेकिन ये शायद ही सुना होगा कि किसी की बेटी का अपहरण करे किसी के साथ शादी कर दिया गया? अगर नहीं सुना है तो फिर NCRB ये डेटा लायी कहाँ से है कि बिहार में साल 2021 के दौरान 6608 लड़कियों का अपहरण करके शादी कर दिया गया था ? हम बताते हैं आपको कि NCRB ये डेटा लाती कहाँ से हैं कि किसी लड़की का अपहरण करके बिहार में बियाह होता होगा।

आपने ये तो नहीं सुना होगा कि फलनवा के बेटी का अपहरण करके फलनवा के बेटा के साथ विवाह कर दिया गया लेकिन ये ज़रूर सुना होगा और खूब सुना होगा कि फलनवा के बेटी फलनवा के बेटा के साथ भाग गई या फलनवा के बेटा फलनवा के बेटी को भगाकर जाकर दिल्ली-ढाका में विवाह कर लिया। उसके बाद ये होता है कि लड़की के बाबूजी थाने पहुँच जाते हैं और लड़का के साथ साथ उसके पूरे ख़ानदान पर अपनी लड़की के अपहरण का केस कर देते हैं। NCRB जो शादी के लिए लड़की के अपहरण का डेटा अपने वार्षिक रिपोर्ट में देती है उसमें से ज़्यादातर आँकड़ा इसी तरह के घटनाओं का होता है।

केस होने के बाद शुरू होता है दारोगाजी का धरपकड़। अगर लड़की-लड़का बालिग़ है तो दारोगाजी लड़की से पूछते हैं कि “बताओ बाबू तुम्हें लड़का ज़बरदस्ती किड़नेप करके ले गया और शादी किया?” अगर लड़की-लड़का का प्यार झूठा होता है या लड़की का प्यार का बुख़ार उतर चुका होता है या माँ बाबूजी और परिवार का प्यार लड़के के प्यार पर हावी हो जाता है तो लड़की लड़का पर अपहरण और ज़बरदस्ती शादी का भी आरोप लगा देती है। बेचारा लड़का के साथ उसका पूरा परिवार थाना में ठूँसा जाता है और लड़की अपने माँ-बाप के साथ अपने घर चली आती है।

लेकिन अगर प्यार सच्चा होता है तो लड़की बोल देती है कि नहीं वो अपनी मर्ज़ी से शादी की है और उसके बाद लड़की के माँ बाप और उसका परिवार अपना लूटा हुआ इज्जत लेकर वापस घर आ जाते है और लड़का लड़की अपने प्यार का जीवन जीने लगते हैं। ज़्यादातर मामले में यही होता है कि लड़की लड़के का साथ देती है और केस रद्द हो जाता है। और यही कारण है कि NCRB की रिपोर्ट में ऐसे लड़की को अपहरण करके ज़बरदस्ती शादी करने के मामले में सजा पाने वाले लोगों की संख्या इस तरह के कुल केस का दस प्रतिशत भी नहीं होता है।

उदाहरण के लिए NCRB के अनुसार साल 2021 के दौरान लड़की को अपहरण करके शादी करने के कुल 6589 मामले आए थे लेकिन उसी साल पुराने और नए सभी केस मिलाकर मात्र 25 मामलों में लड़के को या लड़के के परिवार को सजा मिली थी। इस दौरान 4217 लोगों पर चार्जशीट किया गया और मात्र 30 का कन्विक्शन हुआ। 217 केस फ़ॉल्स पाया गया, और पुलिस ने ही माना कि 2435 केस मिसटेक से हो गया था। मतलब ऐसे जितने शादी के लिए लड़कियों के अपहरण के मामले दर्ज होते हैं उसमें एक प्रतिशत लोगों को भी सजा नहीं मिलती है।  

लड़की का अपहरण करके शादी करने वाला मामला सबसे ज़्यादा सवर्ण जातियों में आता है। 2021 के NCRB के रिपोर्ट के अनुसार पूरे बिहार में इस तरह का कुल 6589 मामलों में से मात्र तीन मामले दलितों के थे जबकि आदिवासियों का एक भी नहीं था। मतलब 6589 मामलों में से 6586 मामले या तो सवर्ण के थे या OBC के। (टेबल स. 7.2)। अब OBC में इस तरह मामले ज़्यादा होते हैं या सवर्ण में ये तो तभी पता चल सकता है जब NCRB भी जातिगत जनगणना करेगी।  

लड़की का शादी के मक़सद से होने वाला अपहरण का आँकड़ा तो हर तरह से मौजूद है, उम्र के हिसाब से भी जाति के हिसाब से भी, राज्य के हिसाब से भी, और ज़िला के हिसाब से भी लेकिन अगर लड़के को किड़नेप करके शादी किया जाता है तो NCRB उसका कोई ब्योरा नहीं रखती है। और इस तरह के लड़के को किड़नेप करके शादी करने वाले मामले में FIR होता भी है तो लड़की के परिवार वलों पर मतलब किड़नेप करने वलों के ऊपर साधारण किड्नैपिंग का केस चलता है।

किड़नेप करके शादी करने के मामले में भारतीय क़ानून मतलब IPC में सिर्फ़ एक धारा है धारा 366 जिसका नाम है Kidnapping, abducting or inducing woman to compel her marriage, etc. और इस क़ानून के तहत किसी के ऊपर केस तभी हो सकता है जब लड़की का किड्नैपिंग हुआ हो शादी के लिए। अगर अपहरण किसी लड़के का हुआ हो शादी के लिए (पकडुआ विवाह) तो उसके लिए कोई अलग क़ानून नहीं है। अब अगर पकडुआ विवाह के ख़िलाफ़ कोई विशेष क़ानून ही नहीं है तो NCRB डेटा लाएगी भी कहाँ से?

अगर NCRB के पास पकडुआ विवाह का डेटा ही नहीं है तो फिर तो पटना से दिल्ली तक बैठे बड़े बड़े पत्राकर महोदय अपने लेख में ये पकडुआ विवाह का आँकड़ा कहाँ से छाप देते हैं कि बिहार में एक साल में तीन हज़ार पकडुआ विवाह हुआ? हमारे पत्राकर महोदय को NCRB के रिपोर्ट को थोड़ी और गहराई से पढ़नी चाहिए। बड़े बड़े पत्राकर महोदय NCRB के रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन करें या नहीं करे लेकिन न्यूज़ हंटर्ज़ जो भी करता है गहराई से ही करता है इसलिए आपको गहराई से खुदाई वाला खबर चाहिए तो देखते रहिए न्यूज़ हंटर्ज़। 

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आपको लगता होगा कि इस तरह से पकडुआ बियाह सिर्फ़ बिहार में ही होता है लेकिन ऐसा नहीं है। NCRB के 2021 के रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 के दौरान पूरे देश में कुल 28,012 महिलाओं का अपहरण ज़बरदस्ती शादी करने के लिए किया गया था जो कि साल 2020 के दौरान 24745 था। इसमें से आसाम सबसे अव्वल हैं जहां प्रति एक लाख जनसंख्या पर ऐसी 19.1 घटनाएँ हुई, जबकि बिहार दूसरे नम्बर पर है जहां प्रति लख जनसंख्या पर ऐसी 11.1 घटनाएँ हुई और पंजाब तीसरे नम्बर पर है जहां प्रति लख जनसंख्या पर ऐसी 10.9 घटनाएँ हुई।

पंजाब में इस तरह की लगभग 87% घटनाएँ 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ होता है जबकि बिहार में इस तरह की मात्र 44%, हरियाणा में 20.80%, और जम्मू कश्मीर में 2.24%, मध्य प्रदेश में 94.18%, झारखंड में 22.34%, और उत्तर प्रदेश में 40.88%। ये प्रतिशत वाला आँकड़ा भी आपको उसी NCRB के रिपोर्ट में मिलेगा लेकिन ऐसे नहीं मिलेगा, इस रिपोर्ट के टेबल 3A.2(i) के आँकड़ो थोड़ा जोड़ घटा गुना भाग करना पड़ेगा तब निकलेगा।

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Raavan Kumar
Raavan Kumar
Raavan Kumar is based in Uttarakhand and do business only in writing.
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