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Caste Reservation: किस राज्य में कितना % जातिगत आरक्षण मिलता है?

बिहार सरकार ने बिहार के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) का दायरा 50% से बढ़ाकर 65% कर दिया है जिसमें 10% ग़रीबों को दिया जाने वाला आरक्षण मिला तो बिहार में कुल आरक्षण की सीमा 75% चली जाती है। बिहार सरकार के इस फ़ैसले के बाद आरक्षण की अधिकतम सीमा पर एक नयी बहस शुरू हो गई।

लेकिन क्या आपको पता है कि इसी देश में एक राज्य ऐसा भी है जहां 100% आरक्षण है? क्या आपको पता है कि इसी देश में अभी भी 12 ऐसे राज्य हैं जिन्होंने ग़रीबों को दिया जाने वाला दस प्रतिशत आरक्षण अपने राज्य में शुरू भी नहीं किया है? क्या आपको पता है भारत में तीन ऐसे राज्य हैं जहां 50% भी आरक्षण नहीं दिया जाता है?

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बिहार सरकार द्वारा जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) का दायरा 50% से अधिक बढ़ाए जाने पर लोग बोलने लगे कि ये तो असंवैधानिक है, संविधान के अनुसार देश में जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) 50% से ज़्यादा बढ़ ही नहीं सकता है। लेकिन क्या आपको पता है देश के कितने राज्यों में 50% से अधिक जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) दिया जाता है?

सबसे पहली बात तो ये कि आरक्षण का दायरा मोदी सरकार ने ही जनवरी 2019 में ग़रीबों को दस प्रतिशत आरक्षण देकर 50% से बढ़ाकर 60% कर चुकी है। हालाँकि जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) अभी भी 50% से कम ही है और जो 10% आरक्षण बढ़ाया गया है वो भी संविधान में संसोधन करके बढ़ाया गया है। साल 2021 में देश की सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस 10% आरक्षण को संवैधानिक बता चुकी है।

लेकिन क़ानून संसोधन और सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बावजूद भाजपा शासित मणिपुर, व अरुणाचल प्रदेश और NDA शासित मेघालय, नागालैंड व सिक्किम समेत 12 राज्यों में ग़रीबों के लिए दिया जाने वाला 10 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं है। पूरे देश में एक भी कांग्रेस शासित प्रदेश नहीं है जहां ग़रीबों को दिया जाने वाला आरक्षण लागू नहीं है। वो 12 राज्य जहां ग़रीबों का 10 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं है वो या तो भाजपा शासित प्रदेश हैं या NDA शासित प्रदेश हैं या फिर केंद्र सरकार द्वारा शासित केंद्रशासित प्रदेश हैं। 

Caste Reservation
अलग अलग राज्यों में जातिगत आरक्षण (Caste Reseration) का अनुपात (इसमें ग़रीबी के आधार पर दिया जाने वाला 10%) आरक्षण शामिल नहीं है।

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क़ायदे से देखें तो 10% ग़रीबों को आरक्षण मिलने के बाद देश में आरक्षण का संवैधानिक दायरा 50% नहीं बल्कि 60% हो चुका है। लेकिन इसके बावजूद इस देश में मात्र पाँच ऐसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश  हैं जहां आरक्षण 50 या 50% से कम है और ये पाँचों के पाँचों केंद्रशासित प्रदेश हैं। हालाँकि जाति आधारित आरक्षण का दायरा संविधान में आज भी 50% ही है लेकिन इस देश में उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, उड़ीसा, हिमांचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, गोवा, दिल्ली और आसाम दस ऐसे राज्य हैं जहां जाति आधारित 50% भी आरक्षण लागू नहीं है। इसके अलावा दादरा नगर हवेली, और चंडीगढ़ जैसे केंद्रशासित प्रदेश में भी पचास प्रतिशत जातीय आरक्षण नहीं है। 

इन 10 राज्यों में जहां 50% जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) लागू नहीं है उसमें से दो आम आदमी पार्टी शासित प्रदेश है, पाँच भाजपा शासित प्रदेश है और मात्र एक कांग्रेस शासित प्रदेश है। इन राज्यों में से सबसे कम आरक्षण भाजपा शासित देव भूमि उत्तराखंड में है जहां मात्र 37% जातीय और 10% ग़रीबी आधारित आरक्षण लागू है जबकि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में मात्र 27% आरक्षण है। 

जातिगत आरक्षण: Caste Reservation

इन राज्यों में से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, और नागालैंड, में 80% आरक्षण है और ये 80 के 80% आरक्षण सिर्फ़ आदिवासियों के लिए हैं क्यूँकि इन तीनों राज्यों में आदिवासियों की जनसंख्या सर्वाधिक है। इसी  तरह लक्षद्वीप में 100% आरक्षण है और वो सौ के सौ प्रतिशत आरक्षण आदिवासियों को है। इस तरह से अलग अलग राज्यों में अलग अलग आरक्षण व्यवस्था है।

जिस राज्य में समाज के जिस वर्ग की जनसंख्या सर्वाधिक है उसे सर्वाधिक जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) है। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, और नागालैंड में 80% आरक्षण आदिवासियों को है क्यूँकि इन चारों राज्यों की 70 से 95 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की ही है। इन चारों राज्यों में ऐसा माना जाता है कि OBC को एक भी प्रतिशत आबादी नहीं है। इसी तरह त्रिपुरा में भी OBC को मात्र 2 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है क्यूँकि माना जाता है कि त्रिपुरा में OBC की जनसंख्या न के बराबर है।

दूसरी तरफ़ तमिलनाडु में OBC को 50% आरक्षण है केरल और सिक्किम में 40-40%, OBC आरक्षण है क्यूँकि माना जाता है कि इन राज्यों में OBC की आबादी अधिक है। अब कितनी अधिक है या नहीं है इसकी पूरी सच्चाई तो इन राज्यों में जातिगत जनगणना करवाने से ही पता चलेगा लेकिन बिहार ने तो जातिगत जनगणना करवाने के बाद OBC का आरक्षण बढ़ाकर 43% OBC कर दिया है। 

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लेकिन क्या जातिगत जनगणना करवा लेना काफ़ी है आरक्षण के दायरे को बढ़ाने के लिए? अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, और नागालैंड में जब आरक्षण 70% से भी अधिक बढ़ाया गया था तो संविधान में संसोधन किया गया। जब राजस्थान, या तमिलनाडु जैसे अन्य राज्यों में में जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) का दायरा जब बढ़ाया गया तो या तो उसे संविधान के 9वीं सूची में डाला गया या फिर 9वीं सूची में डालने का आग्रह किया गया।

जिस तरह से बिहार सरकार ने जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) का दायरा बढ़ाने के बाद इसे संविधान की 9वीं सूची में डालने का आग्रह कर रही है ठीक उसी तरह साल 2019 में जब राजस्थान सरकार ने गुज्जर को पाँच प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण देकर जातिगत आरक्षण (Caste Reservation) का दायरा 50% से अधिक बढ़ा दिया था तो उसके बाद राजस्थान सरकार उसे बार बार संविधान के 9वीं सूची में डालने का आग्रह कर रही है।

बिहार फोबिया:

सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है कि जिस ममता बनर्जी को मुसलमानों का मसीहा बनने का आरोप लगता है उस पश्चिम बंगाल में मात्रा 45% जातीय आरक्षण है लेकिन मुस्लिम को एक प्रतिशत भी आरक्षण नहीं है। जबकि देश में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्य हैं जहां मुसलमानों को 3 से 12% तक अलग से आरक्षण दिया जाता है। उदाहरण के लिए केरल मुस्लिम को 12% आरक्षण देता है जबकी तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक मुस्लिम को 4-4% आरक्षण देता है और तमिलनाडु को 3.5%. 

ऐसे में सवाल सिर्फ़ बिहार पर उठाना कितना लाज़िम है? क्या इस देश को बिहार फोबिया तो नहीं हो गया है? बिहार जातिगत जनगणना करवाता है तो पूरे देश में जातिगत जनगणना पर चर्चा शुरू हो जाता है, बिहार विशेष राज्य का दर्जा माँगता है तो पूरे देश में विशेष राज्य पर चर्चा शुरू हो जाता है, बिहार आरक्षण (Caste Reservation) बढ़ाता है तो पूरे देश में आरक्षण पर चर्चा शुरू हो जाता है, बिहार महिलाओं को 50% आरक्षण देता है तो पूरे देश में 50% महिला आरक्षण लागू हो जाता है। आप बिहारी है तो बिहारी फोबिया रखिया, और गर्व से रखिए।

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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