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Bihar Tourism: अपराध बढ़ने के बावजूद क्यूँ बढ़ रहा है बिहार में पर्यटकों की संख्या?

पर्यटन की अर्थिकी:

अगर कोई देश या राज्य पर्यटन के विकास पर दस लाख रुपए खर्च करती है, मतलब कि निवेश करती है तो उससे लगभग 90 लोगों को रोज़गार मिलती है, और पर्यटक जो समान ख़रीदेंगे उससे राज्य को जो आय होगा वो अलग से है। यही दस लाख रुपए अगर वो राज्य कृषि के विकास पर खर्च करता है तो मात्र 45 लोगों के लिए रोज़गार पैदा होगा और उद्दयोग पर खर्च करता है तो मात्र 13 लोगों के लिए रोज़गार पैदा होगा। ऐसा मैं नहीं, हमारे देश के राष्ट्रपति ने बोला था, 27 सितम्बर 2017 को नैशनल टुरिज़म अवार्ड के वितरण समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बोला था।

देश के राष्ट्रपति ने ये बात यूँ ही मनगढ़ंत नहीं बोल दिया था। WTTC (World Travel & Tourism Council) और PHDCCI (PHD Chamber of Commerce and Industry) की अध्ययन भी यही बताती  है। इस दावे का इतिहास और भी अधिक पुराना है। ये दावा आपको मार्च 2003 में प्रकाशित “Final Report on 20 Years Perspective Tourism Plan for the State of Bihar” के पंद्रहवें अध्याय में भी मिल जाएगा।  

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पर्यटन पुरस्कार:

अब आपको लग सकता है कि मैं ये सब आपको क्यूँ बता रहा हूँ? एक कारण तो ये है कि 28 – 30 July 2023 को बंगलुरु में हुए इंडिया इंटर्नैशनल ट्रैवल मार्ट 2023 में Bihar Tourism को साल 2023 का “Religious Tourism Destination of the Year” का अवार्ड मिला है। दूसरा कारण ये कि उधर केंद सरकार नैशनल टुरिज़म अवार्ड में घपले कर रही है और तीसरा कारण ये कि केंद्र सरकार की पर्यटन प्रोत्साहन नीति कुछ हद तक कुछ राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है लेकिन ऐसे भेदभाव के बावजूद इनमे से कुछ ऐसे राज्य भी है जो रोज़ नए कीर्तिमान बनाए जा रही है।

30 जुलाई 2023 को Bihar Tourism को “Religious Tourism Destination of the Year” अवार्ड मिला। इस कार्यक्रम में बीस राज्यों के साथ साथ पंद्रह देशों ने भी भाग लिया था। इसमें पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वाले कई निजी क्षेत्र जैसे होटेल, ट्रैवल एजेंसी, आदि के व्यवसायीयों ने भी भाग लिया था और उन्हें भी अवार्ड मिला जैसे बेस्ट होटेल, बेस्ट ट्रैवल एजेन्सी का अवार्ड। इसी कार्यक्रम में राजस्थान को भी Best Cultural Tourism Destination of the Year का अवार्ड मिला। Bihar Tourism का बिहार संग्रहालय पहले ही अंतरष्ट्रिय ख्याति के साथ साथ कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड पहले ही बटोर चुका है।

केंद्र सरकार राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार नियमित रूप से क्यूँ नहीं दे रही है? केंद्र सरकार इस राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार को बाटने में घपले कुछ इस तरह कर रही है कि केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों में मात्र एक साल अवार्ड वितरण किया है, जबकि इससे पहले 1990 के दशक से लेकर के 2019 तक ये अवार्ड बिना किसी गैप के हर साल वितरित किया जाता था। लेकिन 2019 के बाद ये अवार्ड सीधे सितम्बर 2022 में बाटा गया और वो भी साल 2018-19 वाला अवार्ड, यानी की सितम्बर 2022 में जो अवार्ड बाटा गया वो 2018-19 वाला अवार्ड था। राम जाने साल 2019-20, 2020-21 और 2021-22 वाला अवार्ड कब मिलेगा और मिलेगा भी या नहीं। 

साल 2022 में जब National Tourism Award 2018-19 दिया गया तो उसमें मध्य प्रदेश अव्वल रहा जिसे कुल आठ अवार्ड मिले, इसी तरह तेलंगाना और गोवा को चार-चार, गुजरात को तीन, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल, को दो दो, और बंगाल को एक ख़िताब मिला। जबकि सर्वश्रेष्ठ राज्य का ख़िताब देवभूमि उत्तराखंड को दिया गया। इसके अलावा निजी क्षेत्र के व्यवसायी को भी कुछ अवार्ड दिए गए। लेकिन सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्य जगह नहीं बना पाए।

Bihar Tourism Award:

इस साल “Religious Tourism Destination of the Year” का अवार्ड बिहार को मिलने के बाद उम्मीद थी कि बिहार को इस साल का नैशनल टुरिज़म अवार्ड भी मिल जाए शायद। लेकिन मोदी सरकार वो अवार्ड बाटेगी तब तो किसी को मिलेगा, वो अवार्ड? क्यूँकि अभी तक के लक्षण से तो लग नहीं रहा है कि केंद्र सरकार ये अवार्ड बाटने के मूड में है, पिछले तीन साल का अवार्ड अभी तक बटा नहीं है।

Bihar Tourism अवार्ड देने में कोताही हो सकती है लेकिन बिहार के इतिहास को कौन बदल सकता है? इसकी विरासत को कौन बदल सकता है? आप और हम क्या कमाएँगे ये तो आगे आने वाला वक्त बताएगा लेकिन हमारे पूर्वजों ने, हमारे बाप-दादाओं ने जो बनाया है उसे कौन मिटा देगा हमसे? हमारी बपौती को कौन छीन लेगा हमसे? लेकिन हमारी बपौती को सहेजना तो कम से कम हमारी ही ज़िम्मेदारी है न?

Bihar Tourism में बिहार के नालंदा और राजगीर को इसी साल पर्यटन मंत्रालय द्वारा बेस्ट हेरिटेज अवार्ड मिल चुका है। इसके पहले 2021 में भी बिहार को इंडिया टुडे टुरिज़म अवार्ड मिल चुका था। लेकिन Bihar Tourism को ये सब अवार्ड तब काम आएँगे जब बिहार, अपराध के बिगड़ते हालात में सुधार कर पाएगा। पिछले कुछ सालों से बिहार में लगातार अपराध बढ़ रहा है। NCRB का डेटा बताता है कि 2005 से लगातार बिहार में अपराध काम हो रहा था लेकिन पिछले 5-6 सालों से बिहार में फिर से अपराध बढ़ रहा है। 2014 से 2019 के दौरान बिहार में कोगजिजिबल क्राइम के मामलों में 133.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

किसी भी राज्य में पर्यटन का विकास सिर्फ़ पर्यटन क्षेत्र पर पैसे खर्च कर देने से, निवेश कर देने से नहीं होता बल्कि पर्यटन के विकास के लिए पर्यटकों कि सुरक्षा की गारंटी देना सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। हालाँकि कम से कम पिछले एक दशक से बिहार में किसी भी पर्यटक के साथ कोई आपराधिक मामला सामने तो नहीं आया है फिर भी बिहार में अगर पर्यटन के विकास को और गति देना है तो बिहार सरकार को सुरक्षा और प्रशासन व्यवस्था पर और अधिक ध्यान देना पड़ेगा। वरना Bihar Tourism पिछले एक दशक से जो रोज़ नए कीर्तिमान बना रहा है उसे धूमिल होने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा।

सरकार को ये बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए कि चुकी उन्होंने Bihar Tourism के लिए बजट बढ़ा दिया, Bihar Tourism के लिए नयी-नयी योजना शुरू कर दी, पर्यटकों के लिए अच्छी अच्छी सुविधाएँ शुरू कर दी तो सिर्फ़ उससे Bihar Tourism का विकास हो जाएगा, तो ऐसा नहीं हैं। जैसे कि आप ये नहीं सोचते हैं कि आपके बच्चे की परवरिश, उसकी शिक्षा-दीक्षा उसके ऊपर किए जाने वाले खर्चे को सिर्फ़ बढ़ाकर हो जाएगा या उसके लिए सिर्फ़ नयी नयी किताबें, नए कम्प्यूटर लाके देकर या अच्छे, कोचिंग संस्थान या अच्छे स्कूल-कॉलेज में अड्मिशन करवा के हो जाएगा। उसी तरह बिहार में पर्यटन का विकास सिर्फ़ पैसे खर्च करके नहीं हो जाएगा।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों से पर्यटन के क्षेत्र में अच्छा ख़ासा खर्च किया है और उसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं। साल 2004-05 में बिहार सरकार ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मात्र 193 लाख रुपए योजनाबद्ध किया था और उसमें से भी 143 लाख अकेले केंद्र सरकार ने आवंटित किया था। लेकिन वर्ष 2011- 12 आते आते बिहार का पर्यटन बजट 193 लाख से बढ़कर बढ़कर 30.4 करोड़ हो गया और साल 2023-24 में बढ़कर 1668 करोड़ रुपए तक हो गया है। 

Bihar Tourism Vs Indian Tourism:

भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 के दौरान बिहार अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटन के मामले पुरे देश में 9वे स्थान पर रहा जबकि यही बिहार साल 2009 तक 18वें स्थान पर था। वर्ष 2017 में पर्यटन क्षेत्र के ऊपर खर्च करने के मामले में बिहार सरकार पूरे हिंदुस्तान में चौथे स्थान पर था। बिहार सरकार के इन ख़र्चों का असर भी दिखा।

वर्ष 2005 में मुश्किल से कुल 63321 विदेशी यात्री बिहार में पर्यटन के लिये आए थे जो 2019 में बढ़कर 10 लाख 93 हज़ार हो गया। यानी कि बिहार में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 2005 से 2019 के बीच लगभग 18 गुना की वृद्धि हुई थी। इसी आँकड़े को राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो पता चलता है कि साल 2005 में पूरे हिंदुस्तान में कुल 39.2 लाख पर्यटक आए थे जो साल 2019 में बढ़कर लगभग 1 करोड़ 9 लाख 30 हज़ार हो गया।

यानी कि देश में पर्यटन के लिए आने वाले विदेश यात्रियों की संख्या में लगभग तीन गुना की वृद्धि जो की बिहार के 18 गुना वृद्धि के सामने कुछ भी नहीं है। बिहार में साल 2005 और 2019 के बीच विदेशी यात्रियों की संख्या में तक़रीबन 18 और घरेलू पर्यटकों की संख्या में लगभग पाँच गुना की वृद्धि हुई।

साल 2005 में कुल 86 लाख 87 हज़ार घरेलू पर्यटक, यानी की हिंदुस्तान के ही अलग अलग राज्यों से बिहार घूमने आए। साल 2019 में ऐसे अन्य राज्यों से आकर बिहार घूमने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़कर 3.5 करोड़ हो गई। यानी कि लगभग साढ़े चार गुना की वृद्धि हुई थी। दूसरी तरफ़ साल 2005 से 2019 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर घरेलू पर्यटकों की संख्या में लगभग छह गुना की वृद्धि हुई। इस तरह से बिहार विदेशी पर्यटकों को तो लुभाने में सफल हो गया है लेकिन घरेलू पर्यटकों को लुभाने में सफल नहीं हो पा रहा है 

हालाँकि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत में आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का मात्र 50-60 प्रतिशत हिस्सा ही घूमने के लिए आते हैं, और बाक़ी का 40-50 प्रतिशत हिस्सा भारत या तो अपना इलाज करवाने, या पढ़ाई करने या फिर व्यवसाय आदि के लिए आते है।

भारत के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में एक और ध्यान देने वाली बात ये है कि साल 2005 में भारत आने वाले सभी विदेशी यात्रियों में से सर्वाधिक 16.6 प्रतिशत विदेशी यात्री ब्रिटेन से थे और दूसरे नम्बर पर अमेरिक से 15.6 प्रतिशत विदेशी यात्री भारत आए थे जबकि तीसरे नम्बर पर बांग्लादेश से 11.6 प्रतिशत बंगलादेशी यात्री हिंदुस्तान आए थे। लेकिन ये आँकड़ा साल 2019 आते आते पूरी तरह उलट गया।

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साल 2019 में भारत आने वाले विदेशी यात्रियों में से सर्वाधिक संख्या बंगलादेशियों का है। साल 2019 के दौरान भारत आने वाले कुल विदेशी पर्यटकों में से बंगलादेशीयों का अनुपात 11.6 प्रतिशत से बढ़कर 23.58 प्रतिशत हो गया, जबकि भारत आने वाले अमरीकी पर्यटकों का अनुपात 15.6 प्रतिशत से घटकर 13.83 रह गया और ब्रिटेन से भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों का अनुपात 16.6 प्रतिशत से घटकर मात्र 9.15 प्रतिशत रह गया। 

दूसरी तरफ़ पूरी दुनियाँ में पर्यटन क्षेत्र के विकास पर नज़र डाले तो पता चलता है कि साल 1950 में कुल 2.5 करोड़ लोगों ने पर्यटन किया था, जो कि साल 2016 में बढ़कर 123 करोड़ हो गई। यानी कि पूरे विश्व में पर्यटकों की संख्या में लगभग 50 गुना की वृद्धि हुई थी। जबकी इसी दौरान विश्व की जनसंख्या लगभग ढाई अरब से बढ़कर लगभग आठ अरब हो गई है यानी कि कुल तीन गुना की वृद्धि।

कहने का मतलब ये है कि पिछले सत्तर वर्षों में विश्व की जनसंख्या में तीन गुना की वृद्धि हुई है लेकिन उसी सत्तर वर्षों के दौरान विश्व में पर्यटकों की संख्या में, घुमक्कडों की जनसंख्या में पचास गुना की वृद्धि हुई। ये अनुपात आगे आने वाले समय में अभी और भी अधिक बढ़ेगा और उसमें भी हिंदुस्तान में तो कुछ ज़्यादा ही बढ़ेगा क्यूँकि हिंदुस्तान अभी एक विकासशील अर्थव्यवस्था है जो रोज़ आगे बढ़ रहा है, समृद्ध हो रहा है।

Bihar Tourism के साथ भेदभाव:

लेकिन भारत इस अवसर का पूर्णतः फ़ायदा तब उठा पाएगा जब केंद्र सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए यानी की पर्यटन के विकास के लिए, सभी राज्यों के साथ समानता के साथ व्यवहार करे, जो कि हो नहीं रहा है। देश का विकास सर्वोपरि हो, राष्ट्र का विकास सर्वोपरि हो, भारत का विकास सर्वोपरि हो, पर्यटन क्षेत्र का विकास सर्वोपरि हो न कि हमारी पार्टी के शासन वाले राज्य का ही विकास सर्वोपरि हो।

उदाहरण के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने पर्यटन के विकास के लिए प्रसाद योजना लायी। इस योजना के तहत देश के दर्जनों तीर्थस्थलों के विकास के लिए पैसा जारी किया, जिसमें बिहार के गया के विष्णुपद मंदिर के विकास के लिए पूरे देश में सबसे कम मात्र 2.91 करोड़ ही दिया गया। जबकि इसी योजना के तहत मोदी सरकार ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को 142.45 करोड़ दिया, उत्तर प्रदेश के वाराणसी को 75.72 करोड़, और उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर को 56.13 करोड़ रूपये दिए। इस योजना के तहत पूरे हिंदुस्तान में 918.92 करोड़ बाटे गए और बिहार के हिस्से मिला 2.91 करोड़, यानी की आधा प्रतिशत भी नहीं। 

इसी तरह से केंद्र सरकार सभी राज्यों को अपने अपने राज्यों में मेला और पर्व मनाने के लिए अनुदान देती है। प्रत्येक राज्य का हक़ है कि वो प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपया केंद्र सरकार से ले। लेकिन Bihar Tourism को ये अनुदान सिर्फ़ 2019-20 के दौरान मिला जब बिहार में NDA की सरकार थी। यानी कि Bihar Tourism को पिछले चार सालों में सिर्फ़ एक साल का अनुदान मिला।

दूसरी तरफ़ छोटे से राज्य मणिपुर को प्रत्येक वर्ष 50 करोड़ मिल रहा है और 2020 तक मणिपुर को 350 करोड़ मिल चुका था, मध्य प्रदेश को 315 करोड़, आसाम को 110 करोड़, हरियाणा को 244, और यहीं बग़ल में यूपी को 235 करोड़ मिल चुका है। ये सब भाजपा शासित प्रदेश हैं। वैसे यूपी को भी 2017 से पहले तक एक रुपया नहीं मिला था जब यूपी में अखिलेश की सपा सरकार थी। मतलब साफ़ है कि Bihar Tourism के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

इसी तरह से भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना में Bihar Tourism के लिए साल 2020 तक मात्र 104.74 करोड़ रिलीज़ किया गया है जबकि पूरे देश में इस योजना के तहत कुल 4137.04 करोड़ रिलीज़ किया गया। यानी की इस योजना में भी Bihar Tourism का हिस्सा ढाई प्रतिशत से अधिक नहीं है। बिहारी होने के नाते इतना ज़रूर याद रखिए कि बिहार में पूरे हिंदुस्तान का 8.60 प्रतिशत जनसंख्या रहती हैं और पूरे देश का 5.3 प्रतिशत क्षेत्रफल बिहार में ही है। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश को काशी विश्वनाथ कॉरिडर योजना दिया गया, दिवाली मनाई गई, राम मंदिर बन रही है, लेकिन उसके बावजूद “Religious Tourism Destination of the Year” का का नैशनल टुरिज़म अवार्ड बिहार ले गया। सिर्फ़ पैसे खर्च कर देने से बच्चों का भविष्य थोड़ो ही न बनता। और ये मैं नहीं बोल रहा हूँ। ये सब आँकड़े खुद मोदी सरकार के पर्यटन मंत्री श्री जी. कृष्ण रेड्डी ने बताए हैं लोकसभा में बहस के दौरान, प्रश्न काल के दौरान बताए, पिछले साल ही।

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Sweety Tindde
Sweety Tinddehttp://huntthehaunted.com
Sweety Tindde works with Azim Premji Foundation as a 'Resource Person' in Srinagar Garhwal.
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